हाथों पर झुर्रियां आ गई, मगर आज भी सही सलामत है सबसे पुरानी दुकान, दिल जीत लिया दादाजी ने...

हाथों पर झुर्रियां आ गई, मगर आज भी सही सलामत है सबसे पुरानी दुकान, दिल जीत लिया दादाजी ने...

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  • 2018-07-12
  • Tara Chand

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Thehook desk:  'हमेशा नकरात्मक सोच को पीछे छोड़कर अपने काम को पहले खत्म करें और फिर दूसरों की मदद करने का सोचे'। 84 साल के बालू गायकवाड ऐसी सोच के साथ पिछले कई सालों से साइकिल की दुकान चला रहे हैं। बालू शॉप शिरगुप्पी गांव में सबसे पुरानी साइकिल रिपेरिंग की दुकान है। उनके झुर्रियों वाले हाथ करुणा की कहानी बताते हैं। ऐसी कहानी जिसने कर्नाटक के चिकोडी और अंतनी ब्लॉक में लोगों से दोस्ती बनाई। 
बालू सातवीं क्लास के बाद पढ़ाई आगे नहीं कर सके। क्योंकि उनके गांव के आसपास कोई स्कूल नहीं थे। बालू के पिता गोपाल गायकवाड चाहते थे कि बालू बेलगाम शहर में आर्मी में ज्वाइंन करे। वो बताते हैं, 15साल की उम्र में हम वहां गए लेकिन उम्र की वजह से दाखिला नहीं हो सका। एक साल बाद, अंकल मुझे गांव से 36 किमी दूर एक दुकान में काम करवाने ले गए। वहां मुझे 45 रुपये महीने के मिलते थे। 
उनके बड़े भाई, शंकर ने साइकिल रिपेयर शॉप खोलने की बाद कही। लेकिन बालू को रिपेरिंग का कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने बताया, मैंने घर के पास साइकिल रिपेयरिंग की दुकान खोली। मगर मैं नहीं जानता था काम कैसे होगा। बस इतना पता था कि पार्ट्स को देखकर लगा सकूं। 
4 साल बाद, बालू ने दुकान को बस स्टैंड के पास लगा दिया। जिसका किराया महीने का एक रुपया था। तब से अब तक वे उसी दुकान को चलते है। उस दुकान का अब किराया 1000 रुपये है। उन्होंने बताया कि पहले गांव में गाड़ियां नहीं होती थी। लोग साइकिल की मदद से बाहर निकलते थे। लोग 4 घंटे तक दूसरे का इंतजार करते थे कि बालू की साइकिल आएगी और हम ले जाएंगे। 
ज्यादातर लोग 70S में साइकिल का किराया नहीं दे पाते थे। वे लोग बालू को अगले महीने किराया देने का वादा करते रहे। उन्होंने कहा, हर कोई मुझे पैसे नहीं दे पाते थे और अगले महीने पर टाल देते थे। मगर मुझे खुशी है कि आज वो सभी मेरे अच्छे दोस्त हैं। 
कई लोगों ने उन्हें अब रिटायर होने की सलाह दी। लेकिन वे अभी भी काम करके लोगों का दिल जीत रहे हैं। उनकी दुकान रोजाना सुबह 8 बजे खुल जाती है। बालू हर दिन 12 घंटे काम करते है और दिन का 250 रुपये निकालते हैं।

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