घर में कुंकिग सीखकर दुनिया में बनाई पहचान, आज हैं कई फूड कंपनियों की मालकिन

घर में कुंकिग सीखकर दुनिया में बनाई पहचान, आज हैं कई फूड कंपनियों की मालकिन

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  • 2018-07-11
  • Tara Chand

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Thehook desk: बहुत कम लोग होते है जो अपने बिजी शेड्यूल से दूसरों की मदद करने को तैयार रहते हैं। उन्हीं में से एक नाम है नीता मेहता का। गृहिणी से कई बिजनेस की मालकिन होने और शेफ और लेखक बनने का नीता मेहता का सफर यादगार रहा है।  नीता मेहता, बतौर फूड ऐंड न्यूट्रीएंट्स ऐक्सपर्ट, देश और विदेश में बेहद लोकप्रिय हैं। नीता की इस लोकप्रियता के पीछे तीन दशकों से भी लंबी यात्रा है।
नीता ने 1982 में अपने घर पर ही कुकिंग क्लास चलाकर, अपने पैशन को सींचना शुरू किया था। वह अपने खुद के पब्लिकेशन हाउस से किताबें निकाल रही हैं। टीवी पर आने वाले कुकरी शोज में वह बतौर सेलिब्रिटी नजर आती हैं।
उनके पति का दवाइयों का कारोबार था, लेकिन वह अच्छा नहीं चल रहा था। इसी कारण नीता ने हाथ बंटाने का फैसला किया। अपनी मां की तरह वो भी बहुत अच्छा खाना बनाना जानती थीं। यहीं एक वजह थी जो उन्हें बेस्ट कुक बना गई।
नीता अपनी क्लासेज में आइसक्रीम बनाना सिखाती थीं। वो वक्त था जब बाज़ार में निरूला की 21 किस्म वाली आइस्‍क्रीम की धूम थी और नीता को पता था कि लोग चाहेंगे कि वो आइस्‍क्रीम घर में बनाना सीखें।  नीता ने बताया कि मेरे बच्चे बड़े हो गए थे और उन्हें पहले की तरह मेरी जरूरत नहीं थी। इसलिए मैंने घर पर बिना एक पैसे के निवेश के क्लासेज़ शुरू की क्योंकि जरूरत की सभी चीज़ें घर पर मौजूद थीं।  मैंने कुछ कुकरी क्लासेज अटेंड की, लेकिन वो बहुत बोरिंग थीं।
हालांकि मैंने सुनिश्चित किया कि मेरी क्लासेज ऐसी न हों। नीता ने चाइनीज, मुगलई, कॉन्टिनेंटल और भारतीय खाना बनाना सिखाना शुरू किया। वो हर स्‍टूडेंट से तीन दिन के 100 रुपए लेती थीं और हर बैच में 20 स्‍टूडेंट्स को सिखाती थीं।  बदलते वक्त के साथ नीता ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। वे यूट्यूब से सभी रेसिपी आसानी से हासिल कर लेती थी। वो स्‍टूडेंट्स को खाने से जुड़ी टिप्स और हिंट भी देती थीं, जो उनकी उम्‍मीदों से बढ़कर साबित होती थीं। 
इस तरह साल 1992 में ‘वेजिटेरियन वंडर्स’की शुरूआत की। लेकिन किताब पूरी होने के बाद उसे छापने के लिए प्रकाशक मिलना चुनौती साबित हो रहा था।  उस साल किताब की महज 3,000 कॉपियां बिकीं। अपनी क्लासेज़ की लोकप्रियता देखते हुए उन्हें इससे बेहतर बिक्री की उम्मीद थी।  एक सफल कुक बुक का मंत्र मिलने के बाद नीता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कुकरी पर 400 किताबें लिखीं। उनकी किताब को फ्लेवर्स ऑफ इंडियन कुकिंग’ ने 1997 में विश्व कुक बुक फेयर अवार्ड जीता था।
साल 2016 में उन्‍होंने नीता मेहता स्‍पाइसेज नाम से मसाले बेचना शुरू कर दिया। उन्‍होंने फूड टेक्‍नोलॉजिस्‍ट से जानकारी ली और अपने अनुभव को भी शामिल किया।  मसालों की पैकेजिंग डिजाइन, प्लांट शुरू करने में 20 लोगों की टीम को एक साल लग गया। बाजार में आने के पहले साल में ही नीता मसाले की बिक्री तीन करोड़ रुपए तक पहुंच गई। 
फिलहाल, नीता 66 साल की हैं लेकिन वो वक्त के साथ चलने में यकीन रखती हैं। 
 

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