सड़कों पर गोलगप्पे बेचने वाला ये लड़का, अब किक्रेट में करेगा देश का नाम रोशन

सड़कों पर गोलगप्पे बेचने वाला ये लड़का, अब किक्रेट में करेगा देश का नाम रोशन

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  • 2018-07-05
  • Pooja gour

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The hook desk: जिंदगी हर रंग दिखाती है। नये सपने सजाती है। लेकिन उन सपनों को नया रुप देने के लिए जिगरा हर किसी के पास नहीं होता । अगर सपने पूरे करने की ललक हो तो यही सपनें रातों को सोने नहीं देते। कई कठिनाई आपका मुंह खोले इंतजार कर रही होती है। उन्ही कठिनाइयों को पार करने वालों को ही मंजिल मिलती है।
आज हम आपको ऐसे ही एक लड़के के बारें में बताएंगे जिसने अपने सपने पूरे करने के लिए क्या कुछ नहीं किया। हम बात कर रहे है यशस्वी जयस्वाल की। जो इंडियन क्रिकेट मुंबई अंड़र-19 में खेलने के लिए तैयार है।
  
यशस्वी जयस्वाल मूलल रुप से यूपी का रहने वाला है जो अपने क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने के लिए मुंबई आ गया था। लेकिन उसे कय् पता था जो सपने वो देख रहा है उसे पाना आसान नहीं है। यशस्वी जयस्वाल ने जब अपना घर छोड़ा था जो उसकी उम्र महज 11 साल की थी। घर छोड़ने पर उसके माता-पिता ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई,क्योंकि उनके पास खुद घर को चलाने के लिए पैसे नहीं थे। बरहाल किसी एकस शख्स का बाहर जाकर कमाना जरूरी हो गया था। यशस्वी तीन साल तक मुंबई में आजाद मैदान ग्राउंड पर ग्राउंड्समैन के साथ मुस्लिम यूनाइटेड के टेंट में रहे। उन्हें ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि आमतौर वह जिस डेयरी की दुकान पर सोते थे, वहां से उन्हें बाहर कर दिया गया था।
अब मुंबई के यशस्वी 17 साल के हो चुके हैं,  यशस्वी कमाल के मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़  है और अब वो श्रीलंका दौरे के लिए मुंबई की अंडर-19 के लिए खेलने के लिए तैयार है। मुंबई के अंडर-19 कोच सतीश समंत ने यशस्वी के बारे में बताते हुए कहा, "उसका फोकस और खेल की समझ कमाल की है। यशस्वी बताते है कि अपना पेट पालने के लिए उन्होंने आजाद मैदान में राम लीला के दौरान (गोलगप्पे) बेचा कर अपना खर्चा निकाला था। मगर कुछ दिन ऐसे भी थे कि जब उन्हें खाली पेट सोना पड़ता था क्योंकि जिन ग्राउंड्समैन के साथ वह रहते थे, वह आपस में लड़ाई करते थे। वह लोग खाना नहीं पकाते थे। और सबके साथ उन्हें भूखा सोना पड़ता था।
यशस्वी को इस मुकाम तक पहुंचाने का पूरा श्रेय उनके के कोच ज्वाला सिंह को जाता है। ज्वाला सिंह भी मुंबई में एक क्रिकेटर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे। लेकिन वो सपना भी पूरा नहीं हो सकता। तब ज्वाला ने 2011 में अपनी क्रिकेट एकेडमी की शुरूआत की थी। अब ज्वाला युवाओं का सपना पूरा करने में उनकी मदद कर रहे हैं

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