काफी बार बदला गया रेडियो का नाम, इस RJ की आवाज के दीवाने हो गए थे लोग

काफी बार बदला गया रेडियो का नाम, इस RJ की आवाज के दीवाने हो गए थे लोग

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  • 2018-07-01
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:रेडियो का ख्याल आते ही शरीर में संगीत की धुने गुनगुनान लगती है। मानों रेडियो को सुनते सुनते संगीत की दुनिया में खो जाए।
रेडियो की बात करे तो ये उतना लोकप्रिय नहीं रहा, जितना टीवी के आने से पहले हुआ करता था। अब रेडियो की जगह मोबाइल ने ले ली है। रेडियो के बारे में सबसे पहले 1860 में सोचा गया था। और अंदाजा लगाया था वेव्स का इस्तेमाल कैसे संचार के लिए किया जा सकता है। साल 1885 में पहली बार एक रेडियो सिंग्नल इटली भेजा गया। रेडियो की शुरूआत Guglielmo Marconi द्वारा हुई। जो एक इटालियन था। 
शुरूआत में जब इसका इस्तेमाल हुआ तब इसे अमेरिकी सेना ने पहले वर्ल्ड वार में दौरान रिस्ट्रिक्टेड कर दिया था ताकि कोई इसका प्रयोग नहीं कर सके।  वहीं बात करे भारत की.. तो यहां रेडियो का चलन बरसों पुराना है। प्रचीन समय में रेडियो ऐसा माध्यम था जिसे सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे। 
भारत में रेडियो को सबसे पहले प्रेसीडेंसी क्लब में 1924 में लेकर आया था। क्लब ने उस समय तीन सालों तक रेडियो पर काम किया।  आर्थिक तंगी के चलते 1927 में क्लब ने इसे बंद कर दिया था। जिसके बाद ठीक इसी साल कुछ बड़े व्यपारियों ने भारतीय प्रसारण कंपनी कोन बोम्बे और कलकत्ता में शुरू किया। 
फिर कंपनी 1930 तक फैल गई। 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो रखा दिया, जिसकी कमान संचार विभाग के हाथों में थी। 
एआईआर ने फिर इस सेवा को आगे बढ़ाया औऱ पूरे देश में रेडियो प्रसारण के लिए तमाम स्टेशन तैयार किए।1957 में ऑल इंडिया रेडियो का नाम बदलकर 'आकाशवाणी' रख दिया। आजादी के समय सिर्फ 6 रेडियो स्टेशन हुआ करते थे लेकिन अब 90s के दौर से नेटवर्क फैल चुका है। और कई स्टेशन अपनी अपनी भाषा में बनने शुरू हुए।
साल 1994 में 70 घंटे की खबरें और मनोरंजन कार्यक्रम 32 सॉफ्टवेयर की मदद से प्रसारित किए जाते थ। अमीन सयानी को भारत में पहले रेडियो जॉकी के रूप में पहचाना जाता है। रेडियो जॉकी के रूप में वो दुनिया के श्रेष्ठ जॉकी माने जाते हैं। करीब 46 सालों तक रेडियो सीलोन के जरिए सयानी की प्रस्तुति और बाद में विविध भारती पर इनके प्रसारण पर लोग आज भी याद करते हैं।

 
 

 

टिप्पणी

  • ashish

    08-08-2018

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