232 साल पहले छपा था भारत का पहला न्यूजपेपर, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखने पर मिलती थी सजा

232 साल पहले छपा था भारत का पहला न्यूजपेपर, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखने पर मिलती थी सजा

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  • 2018-06-21
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:आज की तारीख में न्यूज पेपर जरुरत की चीज बन गई है। भारत में न्यूज पेपर भारत की आजादी से पहले से प्रकाशित होते आ रहे हैं। 
न्यूज पेपर का मुख्य उद्देश्य समाज को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करना है। न्यूज पेपर की समाज में भूमिका के बारे में इसे वाच डॉग के रूप में माना जाता है।
बहुत कम लोगों को मालूम होगा हमारा पहला न्यूज पेपर 232 साल पुराना है। आजादी के पहले के न्यूज पेपरों के समय को सख्त सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप के लिए जाना जाता था। 
अगर कोई अखबार ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कोई खबर लिखता या छापता था तो उसके प्रकाशक को सख्त सजा दी जाती थी। पहला भारतीय न्यूज पेपर 29 जनवरी साल 1780 को जेम्स ऑगस्ट हिक्की द्वारा प्रकाशित किया गया था। 
इसे 'कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर' भी कहा जाता था और लोग इसे 'हिक्की गेज़ेट ' के रूप में याद रखते थे। 1785 में अंग्रेजी भाषा में 'मद्रास कूरियर' रिचर्ड जॉनसन द्वारा प्रकाशित हुआ था। 
डिजिटल इंडिया के दौर में टीवी, न्यू मीडिया और इंटरनेट के दौर में ऐसा माना जा रहा है कि अखबार अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिदू, हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैनस, द ट्रिब्यून, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर आदि समाचार पत्र देश के सबसे बड़े समाचार पत्र माने जाते हैं। प्रिंट मीडिया के लिए आवश्यक है कि वह समाचारपत्र की शक्ति और पहुंच के महत्व को समझे और उन्हें पूरे समाज का सही चित्रण करना चाहिए। 

 

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