भगवा चोला ओढ़ कर चलने वाला सन्यांसी ऐसे बना यूपी का CM, अपने तीखें फैसलों से हमेशा छाए रहे

भगवा चोला ओढ़ कर चलने वाला सन्यांसी ऐसे बना यूपी का CM, अपने तीखें फैसलों से हमेशा छाए रहे

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  • 2018-06-05
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज 46वां जन्मदिन मना रहे हैं। सीएम योगी के जन्मदिन के मौके पर आज हम आपको बताएंगे कैसे गणित का तेज तर्रार लड़का संन्यासी से राजनेता की गद्दी पर बैठने में कामयाब हुआ।
उत्तराखंड के छोटे से कस्बे कोटद्वार में 1991 के छात्र संघ चुनाव में यदि योगी आदित्यनाथ को हार का सामना नहीं करना पड़ता, तो शायद वक्त उन्हें आज योगी की पहचान के साथ इस बुलंदी पर नहीं ले पहुंचाता। कोटद्वार डिग्री कालेज में मिली इस छोटी सी हार ने उनके सामने भविष्य का सुनहरा रास्ता खोल दिया।

पांच जून 1972 को पौड़ी गढ़वाल के पंचेर गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर योगी का जन्म हुआ था। उनका वास्तविक नाम अजय मोहन सिंह है। गढ़वाल विश्वविद्यालय से उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना परिवार त्याग दिया और गोरखपुर चले गए।
बाद में गोरखपुर में महंत अवैद्यनाथ के समाधिस्थ होने पर वह गोरक्षपीठाधीश्वर बने। बारहवीं लोक सभा (1998-99) में मात्र 26 वर्ष की आयु में वह सबसे कम उम्र के सांसद बने। 1991 के छात्र संघ चुनाव में पराजय के बाद वे इस कदर आहत हो गए, कि उन्होंने अपने मामा महंत अवैद्यनाथ को पत्र लिखकर गोरखपुर बुलाने का अनुरोध किया। गोरखपुर पहुंचने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ होकर आज यूपी के सीएम तक का सफर कर लिया।
 शुरू में अंतर्मुखी स्वभाव के योगी इस कस्बे में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। इसलिए सरल सहज रास्ता छात्र संघ का चुनाव लगा। एबीवीपी से वे जुडे़ हुए थे, मगर टिकट उन्हें नहीं मिल पाया। एबीवीपी ने महासचिव पद पर दीप प्रकाश भट्ट को टिकट दिया, तो समर्थकों के कहने पर योगी बागी होकर चुनाव लड़ गए। इस चुनाव में योगी को बुरी तरह पराजय मिली और वे पांचवें नंबर पर रहे।
1992 में वह गोरखपुर चले गए और फिर वहीं के होकर रह गए। कोटद्वार कालेज में योगी जितना भी समय रहे, बेहद सादगी से रहे। हालांकि आगे बढ़ने की एक ललक उनमें हमेशा दिखती रही। यहां उनकी मुलाकत महंत अवैद्यनाथ से हुई। महंत अवैद्यनाथ से मिलने के बाद योगी इतने प्रभावित हुए कि वह महंत अवैद्यनाथ की शरण में चले गए और दीक्षा ले ली। इसके बाद 1994 में वह सन्यासी बन गए। इसके बाद महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। तब से लेकर आज का दिन है योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ के साथ जुड़े हैं। 
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के लाल महंत योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड का कोई मुख्यमंत्री बना हो। गोविंद वल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और एनडी तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यूपी की कमान संभालने के बाद योगी ने कई अहम फैसले लिए, जिसकी चर्चा हमेशा रही। 
1.अवैध बूचड़खानों पर लगाम- गोरक्षा को लेकर योगी सरकार ने आते ही अवैध बूचड़खानों पर ताले लटका दिए। इसको लेकर भी काफी उहापोह की स्थिति बन गई।  इसकी चपेट में बड़े मीट व्यापारी तो आए ही, उनके साथ ऐसे भी लोगों पर असर पड़ा जिनकी रोजी-रोटी इससे चलते थी।  हालांकि कई तरह की कंनफ्यूजन की स्थिति के बाद हालात संभाले गए। 
2. एंटी रोमियो स्क्वाएड- स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं पर कमेंट, छेड़खानी करने वालों के खिलाफ बड़े ही जोर-शोर से अभियान चलाया गया था। इसको लेकर भी पुलिस-प्रशासन में काफी कनफ्यूजन की स्थिति थी। इतना ही नहीं कई जगह तो पुलिसकर्मियों ने प्रेमी जोड़ों को परेशान करना शुरू कर दिया।
3.कर्ज माफी का मुद्दा-
किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा बीजेपी के घोषणापत्र में था। इसको लेकर शुरू में योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई। दरअसल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कह दिया था कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य के किसानों के कर्ज माफी का वहन केंद्र सरकार वहन नहीं करेगी। इसी बीच योगी सरकार ने किसानों को कर्ज माफी का ऐलान कर दिया। 87 लाख लघु और सीमांत किसानों को फायदा मिला। लेकिन इस पर विवाद शुरू हो गया क्योंकि जिन किसानों का कर्ज माफ किया जा रहा है उनको एक सर्टिफिकेट भी दिया गया जिसमें महज 9 पैसे, 18 पैसे, 20 रुपये जैसी छोटी रकम माफ किए गए हैं। 

 

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