कुचल कुचल के न फुटपाथ को चलो इतना यहां पर रात को मजदूर ख़्वाब देखते हैं...

कुचल कुचल के न फुटपाथ को चलो इतना यहां पर रात को मजदूर ख़्वाब देखते हैं...

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  • 2018-05-01
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे, एक बाग नहीं, एक खेत नहीं, हम सारी दुनिया मांगेंगे। फिल्म 'मजदूर' के इस गाने को आज हर कोई याद कर रहा है। 
महेंद्र कपूर ने इस गाने को आवाज देकर लगता है मजदूरों को आवाज दे दी है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर यह गाना याद दिलाता है मजदूरों की उस मेहनत को, जिसके दम पर दुनिया चलती है।
यह दुनिया साल 1886 से मजदूर दिवस मना रही है, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत 1923 से हुई। 
हर साल 1 मई को पूरी दुनिया में मजदूर दिवस मनाया जाता है। इस दिन लेबर यूनियन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन, भाषण, जूलूस और रैलियां भी निकालते हैं।
इस मौके पर सोशल मीडिया यूजर्स भी अलग अंदाज में दिन को मना रहे हैं। कोई अपने संदेश के जरिए मजदूरों के साथ होने वाले अत्याचार की बातों को उठा रहा है तो कोई मजदूरों का हौसला बढ़ाने के लिए दिल छूने वाले शायरी शेयर कर रहा है। कुछ ही घंटो में #LabourDay ट्विटर पर ट्रेंड करने लग गया। आइए आपको पढ़ाते है कुछ बेहतरीन ट्वीट -:
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बता दे कि अंतरराष्‍ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत 1 मई 1886 से हुई। इस दिवस को मनाने के पीछे उन मजदूर यूनियनों की हड़ताल है जो कि आठ घंटे से ज्यादा काम ना कराने के लिए की गई थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेय मार्केट में बम ब्लास्ट हुआ था। जिससे निपटने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी जिसमें सात मजदूरों की मौत हो गई।

इसके बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में जब फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इसको अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए। साथ ही अमेरिका में मात्र 8 घंटे ही काम करने की इजाजत दे दी गई। 
वहीं भारत में मजदूर दिवस सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इस को मद्रास दिवस के तौर पर मनाया जाता था भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को मनाया जाता है।
  

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