नरक से भी बदत्तर जिंदगी जीने को मजबूर हैं मासूम, तस्वीरें देख आपका भी दिल रो देगा

नरक से भी बदत्तर जिंदगी जीने को मजबूर हैं मासूम, तस्वीरें देख आपका भी दिल रो देगा

.
  • 2018-04-16
  • Tara Chand

.

THEHOOK DESK:हमारे सिर के नीचे छत है लेकिन फिर भी हमें अपनी जिंदगी से कितनी ही शिकायतें रहती हैं। लेकिन रोजाना बिना अपनों के ठंडी रातों में ठिठुरते हुए बच्चों की जिंदगी कैसे होती होगी।

 जरा सोचिए आप की उम्र 6 साल की है। कपड़ों के नाम पर आपके पास सिर्फ कुछ फड़े-पुराने चिथड़े हो। लोग आपको घृणा की नजरों से देखें। नंगे पैर और खाली हाथ जहां आपको ये भी ना पता हो कि रात ना जाने कौन से नरक में बितानी पड़ी। पूरी दिन भूखा-प्यासा रहने के बाद आखिरकार रात आती है।
दुकानों के बंद होने का इंतजार होता है। ताकि उसके बाहर सो सके। बढ़ती रात के साथ ठिठुरती हुई ठंड जहां आपका हाथ थामने वाला कोई ना हो। परिवार के नाम पर आप एक आवारा कुत्तों से मिले। एक दिन के लिए ऐसी जिंदगी बितानी पड़े तो... यकीकन आप ऐसा सोचना भी नहीं चाहेंगे।
10 साल का बच्चा अबू कभी-कभी दो दिन तक भूखा प्यासा रहता है, और उसे भूखा ही सोना पड़ता है। जब कूड़े के ढेर से उसे रोटी का टुकड़ा मिलता है, तब वो खुद को खुदकिस्मत मानता है। उसके खाने से लेकर कपड़े, जूते सबकुछ डंपयार्ड से आते है। जिन चीजों को हम फेंक देते हैं, उन चीजों को पाकर ये बच्चे खुद सबसे लकी मानते हैं।
अबू को पैदा होते ही उसके मां-बाप कचरे के ढेर में फेंक गए थे। कूड़े की बदबू उसे अपनी सी लगती है, घर का अहसास करवाती है। यहां घूमने वाले आवारा कुत्ते और पक्षी ही अब उसका परिवार है। अबू की कहानी आपके दिल को भी कचोटती होगी, लेकिन सिर्फ अकेले अबू की ही कहानी नहीं है। उसके जैसे हजारों लाखों मासूमों की भी है, जो ऐसे नरक में जीने के लिए मजबूर है। 

Leave A comment

ट्विटर