Oxford की खूबसूरत सी बिंदास लड़की, महज 35 साल में बन गई थी पाकिस्तान की PM

Oxford की खूबसूरत सी बिंदास लड़की, महज 35 साल में बन गई थी पाकिस्तान की PM

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  • 2018-03-14
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की 12वीं (1988 में) व 13वीं (1993 में) प्रधानमंत्री थीं। रावलपिंडी में एक राजनैतिक रैली के बाद आत्मघाती बम और गोलीबारी से दोहरा अक्रमण कर, उनकी हत्या कर दी गई। पूरब की बेटी के नाम से जानी जाने वाली बेनज़ीर किसी भी मुसलिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री तथा दो बार चुनी जाने वाली पाकिस्तान की पहली प्रधानमंत्री थीं। वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की प्रतिनिधि तथा मुसलिम धर्म की शिया शाखा की अनुयायी थीं।
पाकिस्तान के सबसे बड़े राजनीतिक घराने भुट्टो परिवार में जन्मी बेनजीर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी थीं और सिर्फ 35 साल की उम्र में देश की प्रधानमंत्री बन गई थीं। 1988-90 और 1993-96 में दो बार उन्होंने देश के पीएम की जिम्मेदारी संभाली। 
बेनजीर की शुरुआती पढ़ाई पाकिस्तान के कॉन्वेंट स्कूल में हुई और इसके बाद हायर एजुकेशन के लिए वो अमेरिका गईं। अमेरिका के हार्वर्ड से डिग्री लेने के बाद बेनजीर इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी कोर्स के लिए ऑक्सफोर्ड चली गईं। 
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान बेनजीर अपनी पार्टीज के लिए मशहूर थीं। वो उस दौरान येलो कलर की एमजी कार से चलती थीं और अपने घर में उनकी पहचान एक वेस्टर्नाइज टीनेजर के जैसी थी। अमेरिकी स्टोर साक्स फिफ्थ एवेन्यू कपड़ों के लिए उनकी पहली पसंद था और उनकी लाइफस्टाइल किसी अमीर विदेशी की लाडली जैसी थी। ऑक्सफोर्ड में होने वाली हर पार्टी में वो नजर आतीं। इतना ही नहीं यहां वो ड्रिंक और डांस दोनों एन्जॉय करती थीं। 
हालांकि, उन्होंने इस बात से हमेशा इनकार किया। उस दौरान के उनके साथियों ने वो दौर याद करते हुए बताया था कि ऑक्सफोर्ड में उनकी लाइफ एक कट्टर मुस्लिम परिवार के बंधनों से आजाद हुई अमीर इस्लामी लड़की जैसी थी।
पाकिस्तान में जिया उल हक के दौर में (1979) बेनजीर के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया। पिता के इंतकाल के बाद भुट्टो ने पिता की पार्टी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) से राजनीति की शुरुआत की। 29 साल की उम्र में वो पार्टी की चेयरपर्सन बन गईं। 
हालांकि, पिता की मौत के बाद वो करीब तीन साल तक देश की सैन्य सरकार की कैद में रहीं। ये कैद काटने के बाद उन्हें विदेश जाने की अनुमति मिल गई और वो लंदन चली गईं। साल 1988 में उन्हें इंग्लैंड से पाकिस्तान आने की इजाजत मिली और इसी साल उनकी पार्टी को आम चुनावों में भारी बहुमत से जीत मिली। उन्होंने गठबंधन सरकार बनाई और पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
1987 में भुट्टो ने आसिफ अली ज़रदारी से शादी कर ली। हालांकि, भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद बेनज़ीर को 1999 में एक बार फिर देश छोड़ना पड़ा था।
2007 में पाकिस्तान में जब फौजी ताकत दम तोड़ रही थी और लोग लोकतंत्र के लिए आवाज उठा रहे थे, तब बेनजीर नौ साल का निर्वासन काट देश लौटी थीं।  मुशर्रफ सरकार ने उन्हें वापसी की इजाजत तो दी, लेकिन उन पर जानलेवा हमला होने की आशंका भी जताई थी। हालांकि, उसी साल दिसंबर में रावलपिंडी में अपनी पहली रैली में ही उनकी हत्या कर दी गई।
10 मिनट तक जमीन पर खून से लथपथ पड़ी रहीं थीं बेनजीर। रावलपिंडी के लियाकतबाग में बेनजीर की विशाल चुनावी रैली का आयोजन किया गया था। शाम को वे रैली को संबोधित करने के बाद मंच से उतरीं और लैंडक्रूजर बुलेट प्रूफ कार में सवार हुईं। 
कुछ दूर चलने के बाद उन्होंने अपनी कार का शीशा नीचा किया, ताकि वे लोगों का अभिवादन कर सकें। तभी अचानक घात लगाए मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने उन पर गोलियां चला दीं। जब हमलावर गो‍लियां चला रहे थे, बेनजीर की पाटी के सुरक्षा गार्ड उनकी ओर बढ़े, तभी उन्होंने खुद को गोली से उड़ा लिया।  हमलावरों के पास कुल 4 किलोग्राम विस्फोटक था। बताया जाता है कि बेनजीर के सीने, सिर और गले पर गोलियां लगीं। बेनजीर पर कुल 5 गोलियां दागी गई थीं। घायल बेनजीर जमीन पर 10 मिनट तक बेजार-सी जमीन पड़ी रहीं। कोई और बम फट न जाए, इसकी आशंका के कारण कोई उनके पास नहीं जा रहा था।
दर्दनाक घटना के बाद बेनजीर को अस्पताल ले जाने के लिए कोई गाड़ी नहीं थी। वजह यह थी कि विस्फोट के बाद उनके साथ चल रहे वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। कुछ मिनट बाद उन्हें व्हीलचेयर पर लियाकतबाग के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। जब बेनजीर खून से लथपथ स्थिति में अस्पताल पहुँचीं तो नीम बेहोशी की हालत में थीं। डॉक्टरों ने 30 मिनट तक उनका इलाज किया, लेकिन अधिक खून बहने की वजह से उन्हें सर्जरी के दौरान बचाया नहीं जा सका।
 

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