इस रेगिस्तान के ठीक 100 फीट नीचे बहती हैं नहरें, 3 हजार साल पहले बनी थीं..

इस रेगिस्तान के ठीक 100 फीट नीचे बहती हैं नहरें, 3 हजार साल पहले बनी थीं..

.
  • 2018-03-13
  • Tara Chand

.

THEHOOK DESK:ईरान के रेगिस्तान में ऐसी कई जगह हैं, जहां जमीन से 100 फीट नीचे पानी की नहरें बहती हैं। उन्हें वहां स्थानीय स्तर पर कनात कहा जाता है।
 
 पुरातत्व विभाग के अफसर भी इन नहरों को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। कई सालों तक तो यह भी पता नहीं चला कि इस पानी का स्रोत कहां पर है, लेकिन गहराई से अध्ययन करने के बाद पता चला कि दूर पहाड़ों की रिवर वैली से ये नहरें निकली हैं जो जमीन के अंदर स्वच्छ पानी का बड़ा स्रोत बन गई हैं।
रेगिस्तान में ऊपर से देखने पर गुफा जैसे छोटे-छोटे गड्ढे दिखाई देते हैं। उनके अंदर जाने के बाद पानी बहने की आवाज साफ सुनाई देने लगती है। पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार रेगिस्तान में जमीन से 100 फीट नीचे मौजूद ये नहरें 3,000 वर्ष पुरानी हैं।
 
इन्हें लौह युग में बनाया गया होगा, लेकिन आज इन्हें इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जाता है। जलस्रोत से लंबी नहरे खोदना, उनमें ढाल इस तरह रखना कि पानी बहता भी रहे, लेकिन इतनी तेजी से भी न बहे कि नहरों को नुकसान पहुंचाए, यह सब प्राचीन इंजीनियरिंग का कमाल ही है।
यूनेस्को ने वर्ष 2016 में पर्सियन कनात को विश्व धरोहर घोषित किया था। यूनेस्को ने माना है कि ईरान की प्राचीन सभ्यता में पानी की आपूर्ति का यह श्रेष्ठ उदाहरण है। ​मुस्लिम आक्रमणकारियों और सिल्क रूट के व्यापारियों के साथ कनात की तकनीक अन्य देशों में पहुंची। इसीलिए मोरक्को और स्पेन तक में इनकी मौजूदगी मिलती है।

इन कनात की देखरेख करने वालों को मिराब कहा जाता है। 102 साल के गुलामरेजा नबीपुर कुछ आखिरी मिराबों में हैं। उन्हें ईरान सरकार ने नेशनल लिविंग ट्रेजर का दर्जा दे रखा है। इन कनातों को सालाना मेंटनेंस की जरूरत होती है। पहले यह काम जनभागीदारी से होता था। लेकिन 1960 और 70 के दशक से लोगों की इस काम में रुचि कम होने लगी। वे पहले की तरह कनात पर निर्भर नहीं थे।

Leave A comment

ट्विटर