क्यों कहते हैं औरंगजेब को क्रूर और अत्याचारी? जानें क्या है औरंगजेब का इतिहास

क्यों कहते हैं औरंगजेब को क्रूर और अत्याचारी? जानें क्या है औरंगजेब का इतिहास

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  • 2018-03-03
  • niharika

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Thehook desk : औरंगजेब भारत के इतिहास के पन्नों में दर्ज वह नाम है, जिसकी क्रूरता के किस्सों से आज भी लोग सिहर उठते हैं। इस मुगल शासक ने भारत में कई वर्षो तक राज्य किया। औरंगजेब का जन्म 3 नवम्बर 1618 को दाहोद, गुजरात में हुआ था। वो शाहजहां और मुमताज महल की छठी संतान और तीसरा बेटा था। उसके पिता उस समय गुजरात के सूबेदार थे।
औरंगजेब ने 1658 से 1707 लगभग 50 साल तक शासन किया अकबर के बाद यही मुगल थे जो इतने लम्बे समय तक राजा की गद्दी पर विराजमान रहे।  वो अपने समय का शायद सबसे धनी और शाक्तिशाली व्यक्ति था। औरंगजेब के मौत के बाद मुग़ल एम्पायर धीरे -धीरे खत्म होने लगा था। अकबर ने जिस तरह मेहनत व लगन से मुग़ल साम्राज्य को खड़ा किया था।औरंगजेब ने अपने पूर्वज के काम को बाखूबी से आगे बढ़ाया था। औरंगजेब को उसकी प्रजा पसंद नहीं करती थी इसकी वजह थी उसका व्यवहर। औरंगजेब कटरपंथी पक्के मुस्लमान और कठोर किस्म के राजा थे अकबर ने हिन्दू- मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया था एव वे अपनी हिन्दु प्रजा की जरूरतों का भी ख्याल रखते थे लेकिन औरंगजेब ऐसे बिलकुल न था। औरंगजेब ने पहले तो हिन्दू त्यौहारों पर प्रतिबन्ध लगाया और हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया। बनारस के ‘विश्वनाथ मंदिर‘ एवं मथुरा के ‘केशव राय मंदिर’ को इसी के कहने पर तोड़े गये। बाद में उसने तोड़े गये मंदिरों की जगह पर मस्जिद और कसाईखाने कायम कर दिये। हिन्दुओं के दिल को दुखाने के लिए इस क्रूर शासक ने गो−वध करने तक की खुली छूट दे दी थी। यह हिंदुओं से नफरत करता था, इसिलए उसने हिन्दुओं और सिखों को जबरन मुसलमान बनाने की मुहिम चलाई। फिर जब शाहजहां जब बूढ़े होकर बीमार हो गए तो औरंगजेब ने उन्हें कैद में डाला। 
औरंगजेब के पूरे जीवन में उसने अपना राज्य दक्षिण में 3.5 लाख किलोमीटर तक विस्तृत किया और जिसमे 150-200 लाख लोग उसके राज्य में रहने लगे थे।जब मुघल साम्राज्य युद्ध कर रहा था तभी अचानक एक लड़ाकू हाती ने उनके शरीर पर प्रहार किया, जिससे उन्हें कई दिनों तक चोटिल रहने के बाद भी वे युद्ध में लड़ते रहे, युद्ध का लगभग पूरा क्षेत्र हतियो से भरा पड़ा था और लड़ते-लड़ते ही अंत में उन्हें मृत्यु प्राप्त हुई। और उनकी इसी बहादुरी से प्रेरित होकर उन्हें बहादुर का शीर्षक दिया गया।
अंतिम युद्ध में कमजोर पड़ने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी थी। वे मुघल साम्राज्य के एक निडर योद्धा थे। इसमें संदेह नहीं कि औरंगजेब मुगल सल्तनत के महान सम्राट थे और उनका समय मुग़ल-साम्राज्य की समृध्दि की समृध्दि का स्वर्णिम युग था। 50 वर्ष तक शासन करने के बाद उसकी मृत्यु दक्षिण के अहमदनगर में 3 मार्च सन 1707 ई. में हो गई। दौलताबाद में स्थित फ़कीर बुरुहानुद्दीन की क़ब्र के अहाते में उसे दफना दिया गया। उनकी मृत्यु के 15-16 वर्ष बाद ही मुगल-साम्राज्य का सितारा डूब गया। 

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