अफगानिस्तान भी कभी ऐसा था, लड़कियां स्कर्ट में जाती थीं स्कूल, शांति और खुशहाली थी

अफगानिस्तान भी कभी ऐसा था, लड़कियां स्कर्ट में जाती थीं स्कूल, शांति और खुशहाली थी

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  • 2017-10-01
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK अफगानिस्तान में इन दिनों आतंक और दहशत का माहौल है। हर अफगानी डरा हुआ है। कब किसी जान चली जाए, कब धमाका हो जाए, इसका डर सबको सताता रहता है। लेकिन अफगानिस्तान हमेशा से ऐसा नहीं था। 1960 के दशक में अफगानिस्तान की तस्वीर अलग थी।

उस दशक तक अफगानिस्तान भी आधुनिकता की राह पर चल निकला था। शांति थी, मोहब्बत थी। साल 1967 में एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. पॉडलीच अपने परिवार के साथ काबुल में थे। उन्होंने अफगानिस्तान की कुछ ऐसी तस्वीरें ली, जो यादगार बन गई।
झील के पास पिकनिक मनाते अफगानिस्तानी बच्चे। ये 1960 के दशक का अफगानिस्तान है।
डॉ. पॉडलीन का परिवार काबुल से पेशावर की यात्रा के दौरान बस में सफर करता हुआ।
काबुल नदी में बच्चे और बड़े नहा रहे हैं। ये गर्मियों का मौसम है।
अफगानिस्तानी लड़का केक को सजा रहा है। देखिए 60 के दशक में अफगानिस्तान इतना आधुनिक हो गया था। बच्चे के चेहरे की खुशी देखिए।
डॉ. पॉडलीन की पत्नी जॉन स्तालीफ में शॉपिग करते हुए। इस दौरान बाजार कितना सजा हुआ है। आज के टाइम में ऐसे खुलेआम कोई विदेशी अफगानिस्तान के किसी बाजार में बिना खौफ के नहीं घूम सकती है।
यह काबुल का हायर टीचर्स कॉलेज है। इस कॉलेज में डॉ. पॉडलीन दो साल तक पढ़ाया था। उस उक्त में लड़कियां स्कर्ट पहनकर कॉलेज जाती थीं। आजकल अफगानिस्तान में इसकी कल्पना की जा सकती है?
डॉ. पॉडलीन ने सड़क की मरम्मत करते हुए मजदूरों की भी तस्वीर ली है। कितने खुश और शांत हैं ये मजदूर। पास में एक बच्चा भी खड़ा है।
काबुल के अमेरिकन इंटरनेशनल स्कूल की पार्किंग है। कितना भव्य स्कूल है। 
भाई ऐसी दुकानें तो अपने भारत में भी देखने को मिलती है। 1960 के दशक में अफगानिस्तान में जिलेबी की दुकान चलती थी। दुकानदार के चेहरे पर अपने पेशे की खुशी साफ दिख रही है।
जिस अफगानिस्तान में आज बिना बुर्के के कोई महिला नहीं दिखती है। वहां तक स्कर्ट में लड़कियां स्कूल जाती थी। ये काबुल की सड़क है, जहां लड़कियां बिना किसी डर-भय के स्कूल जा रही हैं। उनके चेहरे पर खुशी भी है। लेकिन आज के वक्त में ऐसा संभव नहीं है। आज तो शायद अफगानिस्तान में आधुनिक स्कूल भी नहीं हैं।

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