पत्रकारिता छोड़ रोटी बैंक से भर रहे हैं 1000 से ज्यादा लोगों का पेट, खुद का खोला रोटी बैंक

पत्रकारिता छोड़ रोटी बैंक से भर रहे हैं 1000 से ज्यादा लोगों का पेट, खुद का खोला रोटी बैंक

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  • 2018-02-14
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:आज भारत उन देशों में है जहां गरीबी और भुखमरी लिस्ट कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। हर चौक-चौराहे में आपको एक भिखारी मिल जाएगा। ना जाने कितने ऐसे लोग है जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती। इसी दर्द को एक पत्रकार नहीं देख पाया और खोल दिया बैक। लेकिन इस बैक में पैसे नहीं दो वक्त की रोटी मिलती है। 
 
बुंदेलखंड के महोबा में पत्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता बने इस शख्स का नाम है तारा पाटकर। तारा पाटकर ने पिछले साल 15 अप्रैल को अपने साथियों के साथ मिलकर रोटी बैंक की शुरुआत की थी। वे लखनऊ में एक दैनिक अखबार में काम कर रहे हैं। वे महोबा के रहने वाले हैं। महोबा की लोगों की गरीबी और भूखमरी को देखकर पाटकर ने लोगों की भूख मिटाने का संकल्प लिया।
रोटी बैंक एक अनूठी पहल है। इसके जरिए बुंदेलखंड की जनता को दोनों वक्त की रोटी मुहैया कराई जा रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखंड में 13 जिले आते हैं। सूखे और बेमौसम बरसात के चलते यहां से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। कई इलाके ऐसे हैं, जहां घरों में बुजुर्ग ही बचे हैं। ऐसी विकट स्थिति में महोबा के गरीब और बुजुर्गों के लिए रोटी बैंक पेट भरने का जरिया बना है।
शुरुआत में पाटकर और उनके दोस्तों ने 10 घरों से दो से चार रोटी और सब्जी का संग्रह करना शुरू किया। शाम को जमा हुए खाने को उन लोगों को बांट दिया जाता था, जो भूखे सोते थे। समय के साथ ही सहयोग करने वालों की संख्या बढ़ी। अब रोटी बैंक को भोजन उपलब्ध कराने वालों की संख्या सात सौ तक पहुंच गई, जिससे करीब पांच सौ लोगों का पेट भर जाता है।
तारा पाटकर ने बताया कि महोबा में एक जनवरी से गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 12 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों से अब दोनों समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बुंदेली समाज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर भोजन का संग्रह करते हैं।
इसके अलावा कई स्थानों पर ऐसे डिब्बे रखे गए हैं, जिनमें लोग पैकेट में लाकर रोटी-सब्जी रख जाते हैं. बाद में खाने के पैकेट बनाए जाते हैं। पैकेट में चार रोटी और सब्जी होती है जो गरीबों में बांटा जाता है।

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