यहां न सड़के हैं और न ही बच्चों के लिए स्कूल, काजू की खेती से गांव के लोगों ने बदली अपनी तकदीर

यहां न सड़के हैं और न ही बच्चों के लिए स्कूल, काजू की खेती से गांव के लोगों ने बदली अपनी तकदीर

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  • 2018-02-14
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:ओडिशा को देश के पिछड़े प्रदेशों में गिना जाता है। इस प्रदेश के कई जिले इतने पिछड़े है कि यहां के लोगों के पास सिर्फ जीवनयापन करने के अलावा कोई और चारा नहीं है।
ओडिशा के दक्षिण पश्चिमी इलाके में एक जिला है नवरंगपुर। 5,291 स्क्वॉयर किलोमीटर में फैले इस जिले की आबादी 12.2 लाख है जिसमें से 56 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है। जिले के हालात इतने बदतर हैं कि न तो रोजगार का कोई विकल्प है और न ही परिवहन के लिए सड़कें। शिक्षा, चिकित्सा और बिजली की बात न ही करें तो शायद बेहतर होगा।

जिले के अधिकतर लोग पैसे कमाने के लिए दक्षिण भारत के तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जाते हैं। इस जिले का एक गांव है अचला। इसे देश का सबसे गरीब गांव माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां के लोगों की जिंदगी में परिवर्तन आया है। इस गांव के लोग काजू की खेती से अपनी जिंदगी संवार रहे हैं।
100 से ज्यादा परिवारों के लोग धान और मक्के की खेती के बाद जनवरी-फरवरी में हैदराबाद और चेन्नई मजदूरी के लिए जाने लगते थे। लेकिन अब हर परिवार ने काजू की खेती शुरू क दी है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी है। गांव की सरपंच निलेन्द्री बत्रा कहती है कि पिछले कुछ सालों में बाहर जाने वालों में बहुत कमी आई है।
इस साल तो सिर्फ 10-12 लोग ही मजदूरी के लिए चेन्नई और हैदराबाद गए हैं। काजू के अलावा सामान्य खेती में भी पैदावार में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। यहां सबसे ज्यादा धान और मक्के की खेती की जाती है। हालांकि मक्के और धान जैसी फसलों की पैदावार ज्यादा होने के कारण उसका दाम भी गिर जाता है, लेकिन काजू की फसल से उन्हें फायदा हो जाता है। लोगों ने काजू की खेती के लिए बैंकों और साहू से कर्ज भी लेना शुरू कर दिया है। काजू में फायदे को देखते हुए गांव वाले रिस्क लेने में भी नहीं हिचक रहे हैं।
 स्वास्थ्य सुविधा भी बदहाल है। गांव के लोगों का कहना है कि कक्षा 1 से 8 वीं तक के लिए सिर्फ 4 शिक्षक हैं। 15 गांव की पंचायत होने के बाद भी सेहत सुविधा के नाम पर सिर्फ एक महिला स्वास्थ्यकर्मी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के 2 कमरों में से भी एक को तो पंचायत भवन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पढ़ाई लिखाई की अच्छी व्यवस्था न होने के कारण अधिकतर आबादी अनपढ़ है। जिसका फायदा उठाकर मनरेगा जैसी योजनाओं के जरिए उनके पैसे कोई और निकाल ले जाता है। लेकिन उम्मीद की जा सकती है कि काजू की खेती से आने वाले समय में लोगों की जिंदगी में सुधार आएगा और उनका जीवनस्तर भी सुधरेगा।

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