रिटायरमेंट की उम्र में शुरू किया था बिजनेस,1000 बार मिली हार, आज है दूसरे सबसे बड़े अमीर शख्स

रिटायरमेंट की उम्र में शुरू किया था बिजनेस,1000 बार मिली हार, आज है दूसरे सबसे बड़े अमीर शख्स

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  • 2018-02-13
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:अगर मैं कहूं कि एक शख्स ने अपने बिजनेस की शुरुआत 62 साल की उम्र में की और देश दुनिया में अपने बिजनेस को फैला कर सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर आ गया तो थोड़ा ताज्जुब तो होगा लेकिन यह सच है...
 कर्नल हारलैंड सांडर्स की कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है। भले ही आप विश्वप्रसिद्ध केएफसी के प्रशंसक हो या न हों लेकिन उसके संस्थापक सांडर्स के संघर्ष के बारे में जानकर आप उनके मुरीद हुए बिना नहीं रह पाएंगे। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां के खाने के शौकीन सांडर्स के उंगली चाटने वाले लाजवाब यानि की फिंगर लिकिन गुड केंटकी फ्राईड चिकन के नाम से अनजान हो।
आंखों पर चश्मा लगाए हुए सांडर्स को उनके साफ-सुथरे सफेद सूट, काली टाई और हाथ में पकड़ने वाली छड़ी से आसानी से पहचाना जा सकता है और केएफसी के हर बोर्ड पर उन्हें इस रूप में देखा जा सकता है। जब उन्होंने 65 वर्ष की आयु में अपना रेस्टोरेंट बंद किया। सारी जिंदगी मेहनत करने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने देखा कि उनके पास बचत के नाम पर कुछ नहीं है और वे बिल्कुल कंगाल हैं।
65 साल की उम्र में उन्होंने रेस्टोरेंट में ताला लगया और रिटायरमेंट लेकर आराम की जिंदगी बिताने का फैसला किया। उसी समय उन्हें सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाली रकम का पहला चेक मिला जिसने उनका जीवन ही बदल दिया। शायद उनकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पेंशन में मिली इस 105 डॉलर की रकम से तो उनकी प्रसिद्धि और आर्थिक समृद्धि की एक नयी इबारत लिखी जाने वाली थी।
इस रकम ने उनकी जिंदगी को बदल दिया और उन्होंने कुछ ऐसा करने की ठानी जिसने भविष्य में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कर दिया। जीवन के 65 बसंत देखने के बाद जब अधिकतर व्यक्ति आराम की जिंदगी जीने की चाह रखते हैं ऐसे समय में कर्नल सांडर्स ने कुछ नया कर दिखाने की ठानी। उन्होंने तय किया कि वे अपने द्वारा तैयार किये गए फ्राइड चिकन से खाने के शौकीनों को रूबरू करवाएंगे।
खाने के शौकीनों तक अपनी इस डिश को पहुंचाना साडर्स के लिये उतना आसान नहीं रहा और उन्हें इसके लिये दिन-रात एक करना पड़ा। प्रारंभ में साडर्स ने अपने इलाके के हर घर और रेस्टोरेंट के चक्कर काटे और लोगों के अपना बनाये हुए चिकन के बारे में बताया। सांडर्स को उम्मीद थी कि उन्हें कोई तो ऐसा साथी मिलेगा जो उनकी इस चिकन के असली स्वाद को पहचानेगा और इसे दूसरों तक पहुंचाने में मदद करेगा लेकिन उन्हें हर ओर से निराशा ही हाथ लगी।
धुन के पक्के और स्वाभाव से हठी सांडर्स ने शुरुआती झटकों से हार नहीं मानी और लोगों को अपने बनाए चिकन का स्वाद चखवाने का दूसरा रास्ता ढूंढा। सांडर्स अपने घर से निकलकर शहर के विभिन्न होटलों में जाते और वहां की रसोई में अपना फ्राइड चिकन तैयार करते। अगर होटल के मालिक को उनका बनाया चिकन पसंद आता तो वह उस होटल के मेन्यू में शामिल हो जाता। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि सांडर्स को पहले होटल मालिक से हां सुनने से पहले 1009 लोगों से ना सुनने को मिली थी लेकिन इतना होने के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं खोया।
जी हां इसका साफ मतलब यह है कि 1009 लोगों ने उनके बनाये फ्राइड चिकन को नकार दिया था जिसके बाद एक व्यक्ति को वह पसंद आया। और इसके बाद शुरू हुआ केएफसी के तैयार होने का सिलसिला। कर्नल और उस होटल मालिक के बीच यह तय हुआ कि वहां बिकने वाले हर चिकन के बदले उन्हें 5 सेंट का भुगतान मिलेगा और इस तरह कर्नल का बनाया फ्राइड चिकन बाजार की दहलीज तक पहुंचने में कामयाब हुआ। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। इस चिकन को पकाने में क्या मसाले इस्तेमाल हो रहे हैं इस राज को राज रखने के लिये कर्नल ने रेस्टोरेंट में मसालों का पैकेट भेजना शुरू कर दिया। इस तरह से वहां उनका चिकन भी बन जाता और दूसरों को उनकी खुफिया रेसिपी का भी पता नहीं चला।

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