बिना रोशनी के 32साल से बना रहे पंचर, 15 मिनट में बनाते हैं ट्रक का पंक्चर

बिना रोशनी के 32साल से बना रहे पंचर, 15 मिनट में बनाते हैं ट्रक का पंक्चर

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  • 2018-02-13
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:बिना रोशनी की आंख के कल्पना करने मात्र से इंसान शिहर उठता है, मगर कहते हैं कि इरादे बुलंद है वो कोई भी काम असंभव नहीं है। 32 साल पहले अपने आंखों की रोशनी खो चुके एक शख्स ने हार नहीं मानी। उसने पंचर की दुकान खोल कर लोगों को अपने काम से ना केवल हैरान कर बल्कि एक मिसाल भी पेश की। 
हंडिया निवासी मुहम्मद आजाद पिछले काफी सालों से दारागंज स्टेशन के पास साइकिल की दुकान रखे हैं। आजाद को कुछ भी दिखाई नहीं देता। आजाद ने बताया कि शादी को करीब एक साल ही हुए थे, जब हवा भरते समय एक ट्रक का टायर फट गया था। उस हादसे ने आंख की रोशनी छीन ली थी। पिछले काफी सालों तक इलाज कराने के बावजूद आंख की रोशनी नहीं लौटी। इसका आम जनजीवन पर काफी बुरा असर पड़ा। पत्नी जूलेखा बेगम के अलावा कोई साथ देने वाला नहीं था। 
उन्होंने इस परेशानी के बावजूद पंक्चर बनाना जारी रखा और आज इस काम के एक्सपर्ट बन चुके हैं। नॉर्मल पंक्चर बनाने वाले को ट्रक का टायर सुधारने में औसतन 30 से 40 मिनट लगते हैं। आजाद आंखों की रोशनी नहीं होने के बावजूद महज 15-20 मिनट में यह काम कर लेते हैं।
आजाद कहते हैं कि मेरे बड़े भाई अब्दुल जब्बार हाईकोर्ट के पास एक पंक्चर की दुकान में काम करते थे। मैंने 12-13 साल की उम्र से उनके साथ पंक्चर बनाना शुरू कर दिया था। दिनभर के काम के बाद भाई को 1 रुपया और मुझे 50 पैसे मजदूरी के मिलते थे।
शादी के बाद भाई ने आजाद की अलग दुकान खुलवा दी। उन्होंने 2800 रुपए में पहली एयर मशीन खरीदी थी। यह दुकान एक पूर्व सांसद के ऑफिस के पास थी, जिससे डेली 4-5 रुपए की कमाई हो जाती थी।

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