स्नेहलता पेंशन के पैसों से चलाती हैं गरीब बच्चों का स्कूल

स्नेहलता पेंशन के पैसों से चलाती हैं गरीब बच्चों का स्कूल

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  • 2018-02-11
  • niharika

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Thehook desk : स्नेहलता को लोग गौरव मां के नाम से भी जानते हैं। 74 वर्षीय स्नेहलता खुद गरीबों की बस्ती में जाती हैं और लोगों को समझाती हैं कि बच्चों को काम पर भेजने के बजाय पढ़ने के लिए भेजो।
 
74 वर्षीय स्नेहलता हुड्डा पहले दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ाती थीं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने गरीब बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया। उनके लिए स्कूल खोल दिया। स्नेहलता ने 'गौरव फाउंडेशन फॉर ह्यूमन ऐंड सोशल डेवलेपमेंट' नाम से एक एनजीओ बनाया। गुड़गांव के सेक्टर 43 में स्थित उनके स्कूल में दिहाड़ी मजदूर और रिक्शा चलाने वाले जैसे गरीब लोगों के बच्चे पढ़ने आते हैं। वर्ष 2005 में जब उन्होंने स्कूल की शुरुआत की थी, तो स्कूल में सिर्फ 20 बच्चे थे। आज लगभग 200 बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। स्नेहलता को लोग गौरव मां के नाम से भी जानते हैं। वे खुद गरीबों की बस्ती में जाती हैं और लोगों को समझाती हैं कि बच्चों को काम पर भेजने के बजाय पढ़ने के लिए भेजो। बच्चों को काम के लिए भेजना माता-पिता के लिए आसान होता है और उससे उन्हें अतिरिक्त पैसे भी मिलते हैं, लेकिन गौरव मां के समझाने पर उस इलाके के लोग अब समझदार हो रहे हैं।
गौरव मां का स्कूल उनके पेंशन से चलता है। इसके अलावा उन्हें थोड़ी बहुत मदद कुछ अच्छे लोगों से मिल जाती है। समय-समय पर लोग बच्चों के लिए कॉपी-किताबें और बाकी सामान दान करते रहते हैं। उन्होंने कहा, कि पैसे कम होने की वजह से थोड़ी मुश्किल तो होती है, लेकिन अगर सच्चा दिल हो तो पहाड़ भी हिलाए जा सकते हैं।
वह कहती हैं, कि गरीब बच्चों को शिक्षित करना हमारा कर्तव्य है। बच्चों को फ्री में पढ़ाने के अलावा वे यूनिफॉर्म, किताबें और खाना भी उपलब्ध कराती हैं। स्कूल में अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई होती है और गौरव मां इस बात पर गर्व करती हैं। क्योंकि उनका मानना है कि आगे की पढ़ाई के लिए अंग्रेजी बहुत जरूरी है और इन बच्चों को वहां तक पहुंचना है।

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