घाटी में आतंकवाद को मकबूल ने दिया था बढ़ावा, जेल से सुरंग बनाकर भागा था पाकिस्‍तान

घाटी में आतंकवाद को मकबूल ने दिया था बढ़ावा, जेल से सुरंग बनाकर भागा था पाकिस्‍तान

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  • 2018-02-11
  • niharika

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Thehook desk : मकबूल भट को कश्मीर में आतंक का पहला पोस्टर बॉय कहा जा सकता है। वह जम्‍मू कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ का फाउंडर था, वही संगठन जिसका मुखिया इस समय यासीन मलिक है। जम्‍मू कश्‍मीर के कुपवाड़ा में मकबूल का जन्‍म 18 फरवरी 1938 को हुआ। 
उसने श्रीनगर के सेंट स्टीफेंस से हिस्ट्री और पॉलिटिक्ल साइंस की पढ़ाई की। उसे उर्दू से मुहब्बत थी।  इसके बाद वो पढ़ाई के लिए पाकिस्तान की पेशावर यूनिवर्सिटी चला गया। वहांसे उसने उर्दू में मास्‍टर्स की डिग्री हासिल कर ली। मकबूल ने कुछ दिनों तक एक टीचर और फिर जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम किया था। 11 वर्ष की उम्र में उसकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उसके दो भाई गुलाम नबी भट और मंजूर अहमद भट सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए। वो फिर पाकिस्तान से ब्रिटेन के शहर बर्मिंघम चला गया। वहां उसने ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ बनाया। दिमाग में फितूर ज्यादा था, तो इसी ऑर्गेनाइजेशन की विंग बनाई ‘जम्मू-कश्मीर नेशनल लिबरेशन फ्रंट(JKLNF)।
मकबूल भट बाद के सालों में पाकिस्तान से इंडिया आ गया। फिर कश्मीर की आजादी की बात करने लगा। सन् 1966 में मकबूल और जेकेएलएफ के कुछ और आतंकियों की सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ हुई। इसमें एक आतंकी मारा गया और मकबूल ने सीआईडी अफसर अमर चंद को मार दिया था। कोर्ट में मकबूल भट अपना गुनाह कबूल चुका था। लेकिन फिर 1968 में श्रीनगर में कैद में रहने के दौरान एक रोज वो दो कैदियों के साथ सुरंग बनाकर जेल से फरार हो गया।
सन 1971 मे मकबूल को लाहौर में एक पैसेंजर प्‍लेन हाईजैक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। भट को पाक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। सन 1974 में उसे रिहा कर दिया गया और दो वर्ष बाद वह भारत आ गया।मकबूल को भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। उसने 1984 में उस समय के राष्‍ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के पास दया याचिका भेजी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।
मकबूल को 1984 में फांसी दे दी गई। उसकी लाश तिहाड़ के अंदर ही दफना दी गई। साल1989 में जेकेएलएफ के आतंकियों ने जज नीलकंठ गंजू की हत्‍या कर दी। गंजू ने ही अमर चंद मर्डर केस में मकबूल को मौत की सजा सुनाई थी। मकबूल भट की मौत के पांच वर्ष बाद जेकेएलएफ ने कश्‍मीर को मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यक राज्‍य का दर्जा दिलाने के लिए घाटी में आतंकी मुहिम की शुरुआत कर दी। इसी आतंकी गतिविधियों का नतीजा था घाटी से कश्‍मीरी पंडितों का पलायन। इसके अलावा जेकेएलएफ आज तक तिहाड़ जेल में रखे उसके अवशेष उन्‍हें देने की मांग करती है। आज भी घाटी के अलगाववादी मकबूल की याद में हर वर्ष 11 फरवरी को मकबूल की याद में एक दिन का बंद रखते हैं।

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