मुफ्त में गरीबों को जिंदगी बांटते हैं ये 'मेडिसिन बाबा', नारंगी रंग की कमीज है इनकी पहचान

मुफ्त में गरीबों को जिंदगी बांटते हैं ये 'मेडिसिन बाबा', नारंगी रंग की कमीज है इनकी पहचान

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  • 2018-02-10
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:भारत के कई राज्यों में ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी पर गरीबी भारी पड़ जाती है...और इलाज के आभाव में उनकी जीवन लीला खत्म हो जाती है। वो अपने इलाज के लिए दवाइयां तक नहीं खरीद पाते..औऱ आखिरी में गरीबी ही मौत बनकर आ जाती है...
  
लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में एक शख्स ऐसे हैं जिन्होंने इस समस्या का हल ढूंढ निकाला है। वैसे तो इस शख्स का नाम ओमकार नाथ है..लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें 'मेडिसिन बाबा' के नाम से जानते हैं, जिनकी उम्र अभी 82 साल है।
82 साल की उम्र में 'मेडिसिन बाबा' रोज़ 5 से 7 किलोमीटर चलकर घर-घर जाकर दवाइयां इकट्ठा करते है। इनका सपना है कि वे उन लोगों के लिए मेडिसिन बैंक खोलें जिनके पास दवाइयां खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं।
मेडिसिन बाबा एक पूर्व सेवानिवृत्त ब्लड बैंक तकनीशियन है। साल 2008 में हुए लक्ष्मी नगर में निर्माणाधीन दिल्ली मेट्रो पुल के गिरने के हादसे ने उनकी दुनिया ही बदल दी। कई लोग घायल होकर भाग रहे थे। आस-पास के अस्पतालों में भीड़ लगी हुई थी पर दवाइयां ना होने के कारण उन्हें इन अस्पतालों से बिना इलाज किये ही वापस लौटना पड़ा। यह नजारा देख कर मेडिसिन बाबा का दिल दहल गया। 
मेडिसिन बाबा ने फिर इस मुश्किल का एक हल ढूंढ निकाला और अकेले ही एक मिशन पर निकल पड़े। यह मिशन था गरीबों के लिए एक मेडिसिन बैंक बनाने का। इसी मिशन के लिए अगली सुबह ओंकारनाथ दिल्ली की गलियों में घर-घर जाकर दवाइयां इकट्ठा करने निकल पड़े।
रोज़ 5 से 7 किलोमीटर चलकर ओमकार नाथ जितनी भी दवाइयां लाते है उन्हें गरीबों में मुफ़्त में बांट देते हैं। कुछ दवाइयां डॉक्टर द्वारा बताई गई होती है, तो कुछ रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली। इन सभी दवाइयों को ओमकार नाथ के दिल्ली के मंगलापुरी में स्थित एक छोटे से कमरे में रखा जाता है।
मेडिसिन बाबा की पहचान उनकी नारंगी रंग की कमीज है, जिसपर उनका फ़ोन नंबर और उनका मिशन बड़े बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है। इसी नारंगी कमीज को पहने, दिल्ली की गलियों में घूमते मेडिसिन बाबा कई लोगों की उम्मीद बन चुके हैं।
मेडिसिन बाबा की ये दवाइयां बड़े-बड़े अस्पतालों जैसे कि AIIMS, डॉक्टर राम मनोहर लोइया अस्पताल, दीन दयाल उपाधयाय अस्पताल, लेडी इरविन मेडिकल कॉलेज और कई आश्रमों में भी दान की जाती है। ओंकारनाथ बताते हैं कि वे एक महीने में कम से कम 4 से 6 लाख तक की दवाइयां बांटते है। कोई भी ज़रूरतमंद इन दवाइयों को शाम 4 से 6 बजे तक ओंकारनाथ के कमरे से मुफ़्त में ले जा सकता है।

 
ओमकार नाथ के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, एक बेटी तथा एक पोती भी है। दिल्ली जैसे शहर में सिर्फ ओंकारनाथ की पेंशन से बड़ी मुश्किल से गुज़ारा हो पाता है। पर फिर भी 82 साल के ये समाजसेवी ना रुकते है न थकते है।

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