जब लोग मुझे मोची कहते हैं, तो अब मैं रोता नहीं, मैं उन्हें देखकर और मुस्कुराता हूं...

जब लोग मुझे मोची कहते हैं, तो अब मैं रोता नहीं, मैं उन्हें देखकर और मुस्कुराता हूं...

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  • 2018-01-14
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:जिनके हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए उनमें आज वो हाथ लोगों के जूते को चमकाने के लिए अपने हाथों के साथ जिंदगी भी काली कर रहे हैं। इनके दर्द का अदांजा आप और हम नहीं लगा सकते।

 उत्तम नाम का ये बच्चा अपने पिता के मरने के बाद उसी पुल के नीचे उनका पॉलिश बॉक्स लेकर बैठा, तो उसके आंसू नहीं रूक रहे थे। लेकिन अपने परिवार के लिए उसे ये करना था। वो अपने पिता के साथ बिताए हुए पलों को याद करके रोता रहा। 
जब उसके पिता जिंदा थे तो वो रोजाना उनके कंधे पर बैठकर कविता गाते हुए स्कूल जाता था। बरसात में अपनी किताबों को प्लास्टिक में लपेटकर स्कूल जाता था, लेकिन कभी कविता पढ़ना बंद नहीं किया। लेकिन पापा के जाने के बाद अपने दोस्तों को स्कूल जाता देख उसका भी मन करता था कि वो भी स्कूल जाकर और नई कविताएं सीखें। पर अब ये सबकुछ खत्म हो चुका है।
तभी उसके पास एक आदमी आया उसने कठोरता से कहा कि मेरे जूते चमका दो, वो बार-बार उसके जूते चमकाने का प्रयास करता जितनी बार भी उसने कहा। उस शख्स ने उत्तम को 80 रु. देकर एक बात सिखाई कि अपनी एनर्जी को काम करने में लगाओं ना कि आंसूओं में बहाओं, ये आंसू कभी कुछ नहीं देंगे। उस दिन उत्तम ने 240 रु. कमाए थे। 
उस दिन को आज 3 साल बीत चुके हैं लेकिन वो कभी रोया नहीं। पढ़ने के लिए खुद स्कूल नहीं जा पाया लेकिन अपने दोनों भाइयों को उसने स्कूल भेजा। "मैंने कविता सीख ली है कि मैं तीन साल पहले खत्म नहीं कर सकता था। मैं अपने आंसुओं को पिया और अपने सपनों के लिए जी रहा हूं।अब जब लोग मुझे मोची कहते हैं, तो अब मैं रोता नहीं, मैं उन्हें देखता हूं और मुस्कुराता हूं। "

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