कुतुबमीनार से ऊंचा है 500 साल पुराना यह किला, इसकी छत से नीला नजर आता है पूरा शहर...

कुतुबमीनार से ऊंचा है 500 साल पुराना यह किला, इसकी छत से नीला नजर आता है पूरा शहर...

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  • 2018-01-14
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK: जोधपुर का मेहरानगढ़ किला 120 मीटर ऊंची एक चट्टान पहाड़ी पर निर्मित है। इस तरह से यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई (73मीटर) से भी ऊंचा है। किले के परिसर में सती माता का मंदिर भी है।
 1843 में महाराजा मान सिंह का निधन होने के बाद उनकी पत्नी ने चिता पर बैठकर जान दे दी थी। यह मंदिर उसी की स्मृति में बनाया गया। इस किले के दीवारों की परिधि 10 किलोमीटर तक फैली है। इनकी ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। इसके परकोटे में दुर्गम रास्तों वाले सात आरक्षित दुर्ग बने हुए थे। घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे, जालीदार खिड़कियां हैं।
जोधपुर शासक राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस किले की नींव डाली और महाराज जसवंत सिंह (1638-78) ने इसे पूरा किया। इस किले में बने महलों में से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि।
इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। माना जाता है कि 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सबसे पहले जोधपुर को टारगेट बनाया गया। माना जाता है कि इस दौरान माता के कृपा से यहां के लोगों का बाल भी बांका नहीं हुआ था। 
मेहरानगढ़ किले में लगे आकर्षक बलुआ पत्थर जोधपुर के कारीगरों की शानदार शिल्पकारी का प्रदर्शन करते हैं। मेहरानगढ़ किले में भव्य महल भी हैं, जैसे मोती महल। इसमें ‘श्रीनगर चैकी’ नाम का जोधपुर का सिंहासन भी है। फूल महल की छत पर सोने का महीन काम किया हुआ है। इसके अलावा यहां रंग महल और चंदन महल भी हैं।
 

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