खाना बनाने के शौक को ठेले से दुनिया तक पहुंचाया, PM मोदी ही नहीं ओबामा ने भी चखा है स्वाद

खाना बनाने के शौक को ठेले से दुनिया तक पहुंचाया, PM मोदी ही नहीं ओबामा ने भी चखा है स्वाद

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  • 2018-01-13
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:बचपन में जब ज्यादातर बच्चे किसी खेल में मशगूल थे, उस दौरान एक 6 साल का बच्चा मैदान से दूर किचन में अपने जुनून को तेज आंच में सेंक रहा था। ये कोई और नहीं है बल्कि अमृतसर के रहने वाले विकास खन्ना हैं। जिन्होंने अपने खाना बनाने के शौक को एक ठेले से दुनिया तक पहुंचाया। शेफ विकास खन्ना की सफलता की एक ऐसी कहानी है, जिससे आप शायद अंजान होंगे।
 
 विकास खन्‍ना का नाम ही उनकी पहचान है। उनके व्‍यक्तित्‍व से तो सभी रूबरू हैं, पर ये बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि वे जन्‍मजात दिव्‍यांग  हैं। इस अनचाही ख्‍ाूबी के बावजूद विकास ने जीवन के विकास पथ पर जिस तरह कदम बढ़ाए हैं, वह काबिलेतारीफ है। 
अपने पैरों को चलने लायक बनाने के लिए बालावस्‍था में विकास ने चीन में बने विशेष जूते पहने, लेकिन वे वजनी और असुविधाजनक थे। दूसरों के ताने और चिढ़ाने से बचने के लिए वह रसोई में जाता और वहां भोजन पका रही दादी मां को बड़े ही चाव से देखता, वे जो मसाले प्रयोग में लाती थीं उनके बारे में हमेशा प्रश्‍न करता। तब वह बच्‍चा नहीं जानता था कि रसोई का यह अनुभव उसके उज्‍जवल भविष्‍य का रास्‍ता तैयार कर रहा है।
उनकी मां हमेशा प्रोत्‍साहित करती थी कि वह एक दिन अमृतसर का सबसे अच्‍छा कुक बनेगा। इसी विश्‍वास के साथ उन्‍होंने लॉरेंस गार्डन बेंक्‍वेट्स नाम से खानपान का व्‍यवसाय शुरू किया। इस तरह पाक कला की उनकी यात्रा शुरू हुई।
मेंगलोर में मणिपाल विश्‍वविद्यालय में प्रवेश करने के लिए एक साक्षात्‍कार के दौरान उनकी अंग्रेजी इतनी कमजोर थी कि इंटरव्‍यू के बाद वह रोने लगे। बाद में विकास न्‍यूयॉर्क चले गए और वहां सलाम बाम्‍बे रेस्‍टॉरेंट में कार्यकारी रसोइया बन गए। उन्होंने बताया कि जब वह अमेरिका गए थे तो उन्होंने रातें सड़कों और स्टेशन पर सोकर बिताईं। शेफ उनसे कहा करते थे कि वे उनके हाथ काट देंगे। लेकिन विकास पीछे नहीं हटे और आज एक नहीं बल्कि पांच मिशलिन अवॉर्ड उनके नाम हैं।

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