हिमालय की ऊंचाइयों पर 14साल में 1बार खिलता है ये ब्रह्मकमल,देखने वाले की हर इच्छा होती है पूर्ण

हिमालय की ऊंचाइयों पर 14साल में 1बार खिलता है ये ब्रह्मकमल,देखने वाले की हर इच्छा होती है पूर्ण

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  • 2018-01-13
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK: ब्रह्म कमल सुंदर, सुगंधित और दिव्य फूल है। देवताओं का प्रिय यह फूल, आधी रात को खिलता है। वनस्पति शास्त्र में ब्रह्म कमल की 31 प्रजातियां बताई गईं हैं। यह फूल हिमालय पर खिलता है। 
प्रकृत्ति से जुड़ी हर चीज बहुत खूबसूरत है, चाहे वो नदियां हों या तालाब, फूल हों या पेड़-पौधे, ये सभी ना सिर्फ आकर्षक हैं बल्कि कई ऐसे गुणों से लैस भी हैं जो मानव हित के काम आते हैं। इनमें से कुछ तो पूरी तरह दैवीय शक्ति वाले माने जाते हैं।
उदाहरण स्वरूप वृक्षों में पीपल और बरगद के पेड़ को ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक माना गया है, नदियों में तो लगभग सभी पवित्र नदियां दैवीय अस्तित्व रखती हैं वहीं अगर फूलों की बात करें तो एक फूल ऐसा है जिसेके विषय में भले ही कम लोग जानते हों लेकिन यह इसकी अलौकिक शक्ति को कम नहीं करता।
ब्रह्म कमल, इसे स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का पुष्प माना जाता है। हिमालय की ऊंचाइयों पर मिलने वाला यह पुष्प अपना पौराणिक महत्व भी रखता है। इस फूल के विषय में यह माना जाता है कि मनुष्य की इच्छाओं को पूर्ण करता है। यह कमल सफेद रंग का होता है जो देखने में वाकई आकर्षक है, इसका उल्लेख कई पौराणिक कहानियों में भी मिलता है।
ब्रह्म कमल से जुड़ी बहुत सी पौराणिक मान्यताएं हैं, जिनमें से एक के अनुसार जिस कमल पर सृष्टि के रचयिता स्वयं ब्रह्मा विराजमान हैं वही ब्रह्म कमल है, इसी में से कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी। दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव जंगल में वनवास पर थे, तब द्रौपदी भी उनके साथ गई थी। द्रौपदी, कौरवों द्वारा हुए अपने अपमान को भूल नहीं पा रही थी, साथ ही वन की यातनाएं भी मानसिक कष्ट प्रदान कर रही थी।
लेकिन जब उन्होंने पानी की लहर में बहते हुए सुनहरे कमल को देखा तो उनके सभी दर्द एक अलग ही खुशी में बदल गए, उन्हें अलग सी आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास हुआ। द्रौपदी ने अपने सबसे अधिक समर्पित पति दुर्योधन को उस सुनहरे फूल की खोज के लिए भेजा, इसी खोज के दौरान भीम की मुलाकात हनुमान जी से हुई थी।
इस कमल से संबंधित एक बहुत प्रचलित मान्यता कहती है कि जो भी व्यक्ति इस फूल को देख लेता है, उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है। इसे खिलते हुए देखना भी आसान नहीं है क्योंकि यह देर रात में खिलता है और केवल कुछ ही घंटों तक रहता है। यह फूल 14 साल में एक बार ही खिलता है, जिस कारण इसके दर्शन अत्यंत दुर्लभ है।
इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म कमल देवी नंदा का प्रिय पुष्प है, इसलिए इसे नंदाष्टमी के समय में तोड़ा जाता है और इसके तोडने के भी सख्त नियम होते है।
ब्रह्मकमल को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तरखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस। उत्तराखंड और हिमालय पर पाया जाने वाले ब्रह्म कमल को हिमाचल प्रदेश में 'दूधाफूल', कश्मीर में 'गलगल', श्रीलंका में 'कदुफूल' और जापान में 'गेक्का विजन' कहते हैं। ब्रह्म कमल का पौधा पानी में नहीं, बल्कि जमीन पर ही होता है।
कहते हैं ब्रह्मा का सृजन ही ब्रह्मकमल है। इसके पीछे एक पौराणिक कहानी का उल्लेख मिलता है। किंवदंती है कि माता पार्वती ने जब गणेश जी का सृजन किया तो भोलेनाथ बाहर गए हुए थे। माता पार्वती स्नान कर रही थीं और उन्होंने गणेश को घर के बाहर पहरा देने के लिए कहा। तभी शिव वहां आए। गणेश ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया। हुआ यूं कि क्रोध में शिव ने गणेश का सिर त्रिशूल से काट दिया। जब माता पार्वती को पता चला तो वह बहुत गुस्सा हुईं। लेकिन जब उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चला तो तो ब्रह्मा जी से आग्रह किया इसके बाद ब्रह्मा ने ब्रह्म कमल का सृजन किया। जिसकी मदद से गणेश जी का सिर हाथी के सिर के रूप में जोड़ा गया।
 

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