जानें किन्नरों से जुड़े ये खौफनाक सच,आखिर क्यों कोई इंसान बन जाता हैं किन्नर या नपुंसक..

जानें किन्नरों से जुड़े ये खौफनाक सच,आखिर क्यों कोई इंसान बन जाता हैं किन्नर या नपुंसक..

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  • 2018-01-13
  • Madhu sagar

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THE HOOK DESK : हमारे देश में किन्नरों को समाज में अलग जगह दी जाती है। यही वजह है कि आज भी लोग उनके जीवन और रहन-सहन के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। 

हम आपको किन्नर समुदाय से जुड़ी कुछ खास बातें…
 
1. ज्योतिष के अनुसार वीर्य की अधिकता से पुरुष (पुत्र) उत्पन्न होता है। रक्त (रज) की अधिकता से स्त्री (कन्या) उत्पन्न होती है। वीर्य और राज समान हो तो किन्नर संतान उत्पन्न होती है।
 
2. महाभारत में जब पांडव एक साल का अज्ञात वास काट रहे थे, तब अर्जुन एक साल तक किन्नर वृहन्नला बनकर रहा था।
 
3. पुराने समय में भी किन्नर राजा-महाराजाओं के यहां नाचना-गाना करके अपना पालन-पोषण करती थी। 
 
4. किन्नर की दुआएं किसी भी व्यक्ति के बुरे समय को दूर कर सकती हैं। धन लाभ चाहते है तो किसी किन्नर के दिए हुए एक सिक्के को पर्स में रखे।
5. एक मान्यता है कि ब्रह्माजी की छाया से किन्नरों की उत्पत्ति हुई है। दूसरी मान्यता यह है कि अरिष्टा और कश्यप ऋषि से किन्नरों की उतपत्ति हुई है।
 

6. यदि कुंडली में बुध गृह कमजोर हो तो किसी किन्नर को हरे रंग की चूड़ियां व साडी दान करनी चाहिए।  इससे लाभ होता है।
 
7. किसी नए वयक्ति को किन्नर समाज में शामिल करने के भी नियम है। इसके लिए कई रीती-रिवाज़ है, जिनका पालन किया जाता है।  
8. फिलहाल देश में किन्नरों की चार देवियां हैं। कुंडली में बुध, शनि, शुक्र और केतु के अशुभ योगों से व्यक्ति किन्नर या नपुंसक हो सकता है।
 
अंतिम संस्कार-  किसी किन्नर की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार बहुत ही गुप्त तरीके से किया जाता है।
मौत के दौरान ,गैर किन्नर को नहीं दिखाया जाता- किन्नरों की जब मौत होती है, तो उसे किसी गैर किन्नर को नहीं दिखाया जाता। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से मरने वाला अगले जन्म में भी किन्नर ही पैदा होगा। किन्नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं।
किन्नरों की संख्या में 40-50 हजार वृद्धि- देश में हर साल इनकी संख्या में 40-50 हजार की वृद्धि होती है। देशभर के तमाम किन्नरों में से 90 फीसद ऐसे होते हैं जिन्हें बनाया जाता है। 
मरने के बाद मातम नहीं मनाते- किन्नर समाज कि सबसे बड़ी विशेषता है मरने के बाद यह मातम नहीं मनाते हैं। किन्नर समाज में मान्यता है कि मरने के बाद इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है। इसीलिए मरने के बाद हम खुशी मानते हैं।
एक खौफनाक सच- यह समाज ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो, जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्वाब देखता हो। यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर समय आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है। बधिया, यानी उसके शरीर के हिस्से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता।

अब देश में मौजूद पचास लाख से भी ज्यादा किन्नरों को तीसरे दर्जे में शामिल कर लिया गया है। अपने इस हक के लिए किन्नर बिरादरी वर्षों से लड़ाई लड़ रही थी। 1871 से पहले तक भारत में किन्नरों को ट्रांसजेंडर का अधिकार मिला हुआ था।
 

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