लंदन से इंजीनियरिंग करके लौटे भारत, आज ये 68 साल का 'मटका मैन' बुझा रहा है गरीबों की प्यास

लंदन से इंजीनियरिंग करके लौटे भारत, आज ये 68 साल का 'मटका मैन' बुझा रहा है गरीबों की प्यास

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  • 2018-01-13
  • niharika

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THE HOOK DESK : आजकल पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्मी बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में लोगों को प्यास भी बहुत लगती है लेकिन राह तलते उन्हें कई जगह पानी पीन को नहीं मिलता।
ऐसे में 68 साल के नटराजन रोज सुबह 4.30 बजे उठ जाते हैं और पीने का पानी पहुंचाने के लिए खासतौर पर बनाई गई अपनी कार में रखे 60 से ज्यादा मटकों में पानी भरते हैं। इसके बाद वह कार को दक्षिणी दिल्ली की ओर लेकर जाते हैं ताकि प्यासे राहगीरों और गरीबों को साफ पीने का पानी उपलब्ध करा सकें। 

दक्षिणी दिल्ली के पंचशील पार्क में रहने वाले नटराजन को अब दिल्ली के 'मटका मैन' का खिताब मिल चुका है। लंदन में करीब 32 साल इंजीनियर के तौर पर काम करने के बाद 2005 में भारत लौटे नटराजन ने बताया कि मलाशय के कैंसर के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। 
उनके कैंसर के बारे में तो बहुत जल्दी पता चल गया था और समय से ट्रीटमेंट हो गया था। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने शांति आवेदना सदन कैंसर हॉस्पिटल के लिए स्वेच्छा से काम किया, वहां उन्होंने उन लोगों की मदद की जो अपने परिजनों का अंतिम संस्कार का खर्च उठाने में असमर्थ थे। 
नटराजन ने कहा, 'कितने ही लोग ऐसे हैं जो अंतिम संस्कार का खर्च उठाने के लिए 500 रुपए भी नहीं जुटा पाते हैं, मैंने उनकी मदद की।' बाद में उन्हें IIT, ग्रीन पार्क, पंचशील और चिराग दिल्ली जैसी जगहों पर पानी के मटके रखने का विचार आया।नटराजन बताते हैं कि यह पानी तीन बोरवेल से आता है। बोरवेल के मालिक इस काम को नेक मानते हैं और उनकी मदद करते हैं।

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