114कमरे, 1000दरवाजे..भारत की शान है 19वीं शताब्दी का महल, यहीं लगा है दुनिया का दूसरा बड़ा झूमर

114कमरे, 1000दरवाजे..भारत की शान है 19वीं शताब्दी का महल, यहीं लगा है दुनिया का दूसरा बड़ा झूमर

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  • 2018-01-12
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:किसी महल की यात्रा हमें उस समय में ले जाती है जब शाही खानदानों का बोलबाला था। भारत में तो कई ऐसे महल आज भी मौजूद हैं पर कोई समय के हाथों बर्बाद हो रहा है तो किसी पर सरकार निगेहबान है। इन्हीं सबके बीच शाही ठाठ-बाट के साथ आज भी अपनी ऐतिहासिक चमक को लिए हुए पश्चिम बंगाल में स्थापित हजारद्वारी महल खड़ा है।
हजारद्वारी ऐसा महल है जिसमें हजार दरवाजे हैं। इस महल का निर्माण 19वीं शताब्दी में नवाब निजाम हुमायूं जहां के शासनकाल में हुआ जिन्होंने बंगाल। इनका राज्य बिहार और ओड़िशा तीनों तक फैला हुआ था। पुराने जमाने में इसे बड़ा कोठी के नाम से जाना जाता था। यह महल पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में स्थित है जो कभी बंगाल राजधानी हुआ करती थी। 
भागीरथी नदी के किनारे बसे इस तीन मंजिले महल में 114 कमरे और 100 वास्तविक दरवाजे हैं और बाकि 900 दरवाजे आभासी। इन दरवाजों की वजह से इसे हजारद्वारी महल कहा जाता है। महल की रक्षा के लिए ये दरवाजे बनवाये गए थे। दरवाजों की वजह से हमलावर भ्रमित हो जाते थे और पकड़े जाते थे। लगभग 41 एकड़ की जमीन पर फैले हुए इस महल में नवाब अपना दरबार लगाते थे।
अंग्रेजों के शासनकाल में यहां प्रशासनिक कार्य भी किये जाते थे। इस महल का इस्तेमाल कभी भी आवासीय स्थल के रूप में नहीं किया गया। महल के दीवार को निजामत किला या किला निजामत कहा जाता है। महल के अलावा परिसर में निजामत इमामबाड़ा, वासिफ मंजिल, घड़ी घर, मदीना मस्जिद और बच्चावाली तोप भी स्थापित हैं। 
12-14 शताब्दी में बनी इस 16 फीट की तोप में लगभग 18किलो बारूद इस्तेमाल किया जा सकता था। कहते हैं कि इसे सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल किया गया है और उस समय धमाका इतना बड़ा और तीव्र हुआ था कि कई गर्भवती महिलाओं ने समय से पूर्व ही बच्चों को जन्म दे दिए था, इसलिए इसे बच्चावाली तोप कहते हैं।
भागीरथी नदी के तट से लगभग 40 फीट के दूरी पर बने इस महल की नींव बहुत गहरी रखी गई थी, इसलिए आज भी यह रचना इतनी मजबूती से खड़ी है। महल की ओर जाती भव्य सीढ़ियां और भारतीय-यूरोपियन शैली इस संरचना के अन्य मुख्य आकर्षण हैं। महल संग्रहालय के पुरावशेष में शाही परिवार के कई सामान मौजूद हैं, जिनमें दरबार हॉल में लगा हुआ खूबसूरत झूमर भी शामिल है। यह झूमर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा झूमर है, पहला बकिंघम महल में है। यह झूमर नवाब को रानी विक्टोरिया द्वारा तोहफे के रूप में भेंट किया गया था।
संग्रहालय की गैलरियों में शस्त्रागार विंग, राजसी प्रदर्शनी, लैंडस्केप गैलरी, ब्रिटिश पोर्ट्रेट गैलरी, नवाब नाज़िम गैलरी, दरबार हॉल, समिति कक्ष, बिलबोर्ड कक्ष, पश्चिमी ड्राइंग कक्ष और धार्मिक वस्तुओं वाली गैलरी शामिल हैं। इस महल को देखने के लिए कुछ प्रवेश शुल्क भी निर्धारित है। शुक्रवार के दिन यह महल पर्यटकों के लिए बंद रहता है।

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