1945 की उस सुबह हिरोशिमा पर आई थी कयामत, आग के गोले से पूरा शहर बन गया था मौत का खंडहर

1945 की उस सुबह हिरोशिमा पर आई थी कयामत, आग के गोले से पूरा शहर बन गया था मौत का खंडहर

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  • 2018-01-10
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:हिरोशिमा और नागासाकी पर 1945 में हुए परमाणु हमले अब तक अकेले परमाणु हमले और सबसे खतरनाक हमले हैं। दुनिया भर में बढ़ती हिंसा हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु हमले इंसानों के लिए चेतावनी है।
हिरोशिमा शहर की 6 अगस्त 1945 की सुबह काल बनकर आई। जापान के समय अनुसार 8 बजकर 15 मिनट शहर के केंद्र से 580 मीटर की दूरी पर परमाणु बम का विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में शहर का 80 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो चुका है। मानो नाभिकीय आग का गोला फूटा जिसमें लोग, जानवर और पौधे खत्म हो गए। पूरा शहर मलबे के तब्दील हो गया। 
पोट्सडम में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन को यह खबर मिली कि न्यू मेक्सिको में परमाणु बम का परीक्षण सफल रहा है और लिटल बॉय नाम का बम प्रशांत क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है। पोट्सडम में ही ट्रूमैन और चर्चिल के बीच इस बात पर सहमति बनी कि यदि जापान फौरन बिना शर्त हथियार डालने से इंकार करता है तो उसके खिलाफ परमाणु बम का इस्तेमाल किया जाएगा।
जापान के समर्पण नहीं करने पर हिरोशिमा पर हमले के लिए पहली अगस्त 1945 की तारीख तय की गई। तूफान के कारण हमले को रोकना पड़ा। पांच दिन बाद इनोला गे विमान 13 सदस्यों वाले कर्मीदल लेकर हमले के लिए रवाना हुआ। लड़ाकू विमान के कर्मियों को उड़ान के दौरान पता लगा कि उन्हें लक्ष्य पर परमाणु बम गिराना है।
कहते हैं कि परमाणु बम हमले के बाद हिरोशिमा के ढाई लाख निवासियों में 70-80 हजार की फौरन मौत हो गई। धमाके के कारण पैदा हुई गर्मी में पेड़ पौधे और जानवर भी झुलस गए। इस इमारत को छोड़कर कोई भी इमारत परमाणु बम की ताकत को बर्दाश्त नहीं कर पाई। यह इमारत थी धमाके से 150 मीटर दूर शहर के वाणिज्य मंडल की। लकड़ी के बने कुछ पुराने मकान परमाणु हमले और उसके बाद हुई तबाही की दास्तान सुनाने के लिए बच गए।
हिरोशिमा में परमाणु धमाके के आस पास के लोगों के लिए मौत से बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी। दूर में जो बच गए उनका शरीर बुरी तरह जल गया था। जलने, विकिरण का शिकार और घायल होने के कारण लोगों का मरना कई दिनों और महीनों में भी जारी रहा। यह महिला सौभाग्यशाली रही, बच गई लेकिन गर्मी की वजह से शरीर पर कपड़ा चिपक गया। पांच साल बाद परमाणु हमलों में मरने वालों की संख्या 230,000 आंकी गई।
 

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