अदम्य साहस के कारण जाने जाते हैं हंगपन 'दादा', अकेले मार गिराए थे 4 आतंकी

अदम्य साहस के कारण जाने जाते हैं हंगपन 'दादा', अकेले मार गिराए थे 4 आतंकी

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  • 2018-01-09
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक मिशन के दौरान 3 आतंकवादियों को अकेले ही मौत के घाट उतारने और अपने साथियों की जान बचाकर शहादत को गले लगाने वाले हवलदार हंगपन दादा को कौन भूल सकता है। हंगपन दादा बचपन से ही अपने साहस के लिए जाने जाते थे। इसका उदाहरण है उनका दोस्त सोमहंग लमरा। सोमहंग बताते है कि आज वह जिंदा हैं तो हंगपन दादा की वजह से, उन्‍होंने बचपन में उन्हें पानी में डूबने से बचाया था।
 
वे शारीरिक रूप से बेहद फिट थे। हर सुबह दौड़ लगाते, पुश-अप करते। इसी दौरान खोंसा में सेना की भर्ती रैली हुई, जहां वह भारतीय सेना के लिए चुन लिये गए।
पिछले साल 26 मई को कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर सेना के ठिकानों का आपसी संपर्क तोडऩे के बाद भाग रहे आतंकवादियों का पीछा करने और उन्हें पकडऩे की जिम्मेदारी असम रेजीमेंट/35वीं बटालियन के हवलदार हंगपन दादा और उनकी टीम को सौंपी गई थी।
पहले कमांडो रह चुके दादा अपने विवेक और समझ का परिचय देते हुए ऊंचाई वाले दुर्गम बर्फीले क्षेत्र में इस तेजी से आगे बढ़े कि आतंकवादियों के बच निकलने का रास्ता बंद हो गया। इसके बाद आतंकवादियों ने उनके दल पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने तुरंत निर्णय लेते हुए अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना एक ओर सरक कर पत्थरों और चट्टानों के पीछे छिपे आतंकवादियों के काफी करीब पहुंच गए जिसके कारण उनके साथियों की जान बच गई। 
उन्होंने नजदीकी गोलीबारी में 2 आतंकवादियों को मार गिराया। इसमें वह भी गंभीर रूप से घायल हो गए लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बचे हुए आतंकवादियों का पीछा किया।
इस कार्रवाई में उनका सामना तीसरे आतंकवादी से हुआ। शहादत को गले लगाने से पहले हवालदार हंगपन दादा ने उस आतंकवादी को भी मार गिराया। मिशन दल के अन्य सदस्यों ने चौथे आतंकवादी को भी ढेर कर दिया। उनके अदम्य साहस के लिए दादा को आज मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा गया। 

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