कॉलेज में ब्यूटी क्वीन के नाम से जानी जाती थीं प्रतिभा पाटिल, ऐसा था इनका राजनीतिक सफर

कॉलेज में ब्यूटी क्वीन के नाम से जानी जाती थीं प्रतिभा पाटिल, ऐसा था इनका राजनीतिक सफर

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  • 2017-12-19
  • Tara Chand

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THEHOOK DESK:प्रतिभा पाटिल… ये नाम सुनते ही साड़ी पहने एक महिला की तस्वीर सामने आ जाती है। वे देश की पहली महिला राष्ट्रपति थी।  पाटिल। इन्हें देखकर अब कोई भी नहीं कह सकता कि कॉलेज में ब्यूटी क्वीन कहलाई जाने वाली ऐसे सादगी जिंदगी जीती होगी।
स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति बनने वाली प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ था। 
कहा जाता है कि स्कूल के दिनों में खेलों से जुड़ी रहीं। राजनीति में भी लंबा अरसा गुजारा। प्रतिभा पाटिल एक बेहद सम्माननीय महिला के तौर पर देखी जाती हैं। केवल इसलिए नहीं कि वह भारत की राष्ट्रपति थी, बल्कि इसलिए क्योंकि देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने एक महिला होने के नाते अपनी गरिमा को बनाए रखी। उनका व्यक्तित्व स्वयं में एक शांत और निर्मल स्वभाव की महिला की पहचान है।
आपको बता दे कि प्रतिभा पाटिल ने 27 वर्ष की उम्र में अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। और 1962 से 1985 तक पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। इसके बीच वे महाराष्ट्र सरकार में राज्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री रहीं। इनकी विशेष रुचि ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के विकास और महिलाओं के कल्‍याण में अधिक रही है। वह राष्‍ट्रीय सहकारी शहरी बैंक और ऋण संस्‍थाओं की उपाध्‍यक्ष तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, महाराष्‍ट्र की अध्‍यक्ष तक रही हैं। 
प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने अमरावती में दृष्टिहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कक्षाओं, पिछड़े वर्गों और अन्‍य पिछड़े वर्गों के बच्‍चों के लिए नर्सरी स्‍कूल खोल कर उल्‍लेखनीय योगदान दिया। किसान विज्ञान केन्‍द्र, अमरावती में किसानों को फसल उगाने की नई एवं वैज्ञानिक तकनीकें सिखाने, संगीत और कम्‍प्‍यूटर की कक्षाएं भी आयोजित करवाईं।
जुलाई 7,1965 को श्रीमती प्रतिभा की शादी देवसिंह रनसिंह शेखावत से हुई। श्रीमती पाटिल की एक पुत्री और एक पुत्र हैं। साल 1967-72 तक वे राज्य की शिक्षा विभाग की उप-मंत्री रहीं। वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष की लीडर भी रही हैं।
उन्हें नवम्बर 8, 2004 को राजस्थान की 24वीं राज्यपाल घोषित किया गया था। यूपीए सरकार ने जून 14, 2007 को इन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। जुलाई 19, 2007 को चुनाव में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने के बाद उन्होंने जुलाई 25, 2007 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। वर्ष 2012 में इनका कार्यकाल खत्म हुआ।

 

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