कभी गरीबी में कर्ज लेकर फैक्ट्री शुरू की थी, आज लोगों को बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज दे रहा है...

कभी गरीबी में कर्ज लेकर फैक्ट्री शुरू की थी, आज लोगों को बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज दे रहा है...

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  • 2017-12-08
  • niharika

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THEHOOK DESK: गर्मी हो या सर्दी फ्रीज की जरूरत हर मौसम होती है और बिजली चली जाए तो हर किसी के लिए काम मुश्किल होता है। ऐसे में आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी पहचान उसका handmade काम बताता है।
गुजरात के राजकोट निवासी मनसुखभाई प्रजापति बचपन से ही मिट्टी की चीजों से खेलते और उन्हें बनाते आए थे। लेकिन बड़े हुए तो देखा कि मार्केट में मिट्टी से बनी चीजों की बजाय प्लास्टिक के सामान की उपयोगिता अधिक है। उन्होंने बिजनेस के इस माइंडसेट को बारीकी से समझा और मिट्टी की खुशबू बरकरार रखने के लिए 'मिट्टीकूल' नाम की कंपनी बनाई।
 यह कंपनी मिट्टी के फ्रिज, कुकर और वाटर फिल्टर बनाती है। अपने पारंपरिक पेशे को नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाले मनसुखभाई को हाल ही अंतरराष्ट्रीय मैगजीन फोब्र्स ने ग्रामीण भारत के शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने भी उन्हें 'ग्रामीण भारत का सच्चा वैज्ञानिक' की उपाधि से नवाजा था। इनके उत्पादों की भारत में ही नहीं दुबई, जापान और अमरीका में भी काफी मांग है।
मनसुख के पिता कुम्हार थे। लेकिन पर्याप्त आमदनी न होने से उन्होंने इस पेशे को छोड़ दिया। उन्होंने मनसुख को स्कूल भेजा ताकि वे पढ़-लिखकर नौकरी करें। मगर मनसुख 10वीं कक्षा में फेल हो गए और पढ़ाई बीच में ही छोड़ चाय बेचने लगे। तब तक मनसुख की सगाई हो गई थी और उन्हें हर पल यही लगता कि कोई मेरी मंगेतर से क्या कहेगा कि 'तेरा होने वाला पति चाय का ठेला लगाता है'। इसलिए उन्होंने फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया और यहीं से उन्हें अपनी फैक्ट्री खोलने का खयाल आया।
पिता को डर था कि बेटा बिजनेस नहीं कर पाएगा इसलिए उन्होंने मनसुख को कर्ज लेने से मना किया। लेकिन मनसुख के हौसले मजबूत थे उन्होंने 30 हजार रुपए का कर्ज लेकर फैक्ट्री शुरू की और 1988 में दुनिया की पहली मिट्टी का तवा बनाने वाली मशीन बनाई। मशीन पर कई प्रयोग कर वे पहले दिन 50 तवे ही बना पाए। प्रयास जारी रहा व मनसुखभाई की मेहनत से एक घंटे में 600 तवे बनने लगे।
उनका बनाया पहला तवा 50 पैसे में बिका। पत्नी के कहने पर 2005 में नॉन स्टिक लेयर वाला मिट्टी का तवा बनाया। जिसकी कीमत 25 रुपए है। खाने के पोषक तत्त्वों को बरकरार रखने के लिए बनाया मिट्टी का कुकर। इसके दाम 500-1000 रुपए तक हं। वैज्ञानिकों की सलाह से पांच साल तक कई प्रकार की मिट्टी पर प्रयोग कर बनाया 'मिट्टी का फ्रिज'।
उन्होंने देखा कि गांव के लोगों को दूषित पानी पीने से कई रोगों का सामना करना पड़ता है और उनकी ज्यादातर कमाई इलाज के खर्च में चली जाती है। ऐसे में उन्हें मिट्टी से वाटर फिल्टर बनाने का खयाल आया। इससे पानी फिल्टर होने के साथ ठंडा भी हो गया। 2001 में उन्होंने इसका पेटेंट कराया और यहीं से शुरू हुआ 'मिट्टीकूल' का सफर। 2001 में जब गुजरात में भूकंप आया तो उन्हें भारी नुकसान हुआ।
लोगों ने वाटर फिल्टर के संबंध में कहा 'गरीबों का फ्रिज टूट गया'। गरीबोंं को बिजली के बिल से बचाने व ईको-फ्रेंडली उत्पाद बनाने के लिए उन्होंने 2005 में बिना बिजली से चलने वाले फ्रिज बनाया। यह फ्रिज वाष्पीकरण के सिद्धांत पर काम करता है। इसके ऊपरी भाग में 10 लीटर पानी की क्षमता वाली टंकी लगी है और फ्रिज के दाएं व बाएं भाग में लगी मिट्टी में छोटे-छोटे छेद होते हैं। जब ऊपर का पानी साइड की मिट्टी में रिसता है तो बाहर की हवा से अंदर कूलिंग होने लगती है। इसकी शुरुआती कीमत तीन हजार है। इस फ्रिज में पानी ठंडा होने के अलावा 5 दिन तक सब्जियां खराब नहीं होतीं।
 

टिप्पणी

  • DHEERAJ KUMAR

    08-12-2017

    I want to buy,how

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