दिल्ली में सड़क के किनारे चाय बेचते हैं लक्ष्मण राव, अब तक लिख चुके हैं 24 किताबें

दिल्ली में सड़क के किनारे चाय बेचते हैं लक्ष्मण राव, अब तक लिख चुके हैं 24 किताबें

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  • 2017-12-05
  • niharika

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Thehook desk : दिल्ली में रहने वाले लक्ष्मण राव पेट पालने के लिए लोगों को चाय बनाकर पिलाते हैं लेकिन उनकी असली पहचान एक लेखक के तौर पर है। वो अबतक 24 किताबें लिख चुके हैं। उनके लिखे हुए उपन्यास ‘रामदास’ के लिये उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। 

उनके सभी जानने वाले उन्हें ‘लेखकजी’ कहकर पुकारते हैं और यह संबोधन सुनकर लक्ष्मण राव की बांछे खिल जाती हैं। वे बीते 25 वर्षों से चाय बेचने का काम कर रहे हैं ओर इस काम को करने से पहले वे एक बर्तन मांजने वाले, एक मजदूर और घरेलू नौकर के रूप में भी काम कर चुके हैं ।
महाराष्ट्र में पैदा हुए लक्ष्मण राव, पिछले 40 सालों से साहित्य की सेवा कर रहे हैं वो कहते हैं कि साहित्य मेरा शौक है और चाय बेचना मेरा रोजगार। इसलिए वो जहां चाय बेचते हैं वहीं पर अपनी किताबें भी बेचते हैं। 
लक्ष्मण राव भी रोजाना 5 अखबार पढ़ते हैं। वो बताते हैं कि इन्दिरा  गांधी के कार्यकाल के दौरान वो पूर्व प्रधानमंत्री से मिली थे और उनके ऊपर एक किताब लिखने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन इन्दिरा गांधी ने अपने कार्यकाल पर किताब लिखने की अनुमति दी थी। उनकी यह पुस्तक 1984 में प्रकाशित हुई थी। 

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