‘लगान’ की शूटिंग के लिए बसाया गया गांव, 300 भारतीय स्टार, 15 ब्रिटिश एक्टर और 10000 की जुटाई गई थी भीड़

‘लगान’ की शूटिंग के लिए बसाया गया गांव, 300 भारतीय स्टार, 15 ब्रिटिश एक्टर और 10000 की जुटाई गई थी भीड़

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  • 2017-11-15
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK फिल्म ‘लगान’ की सफलता के बारे में हर कोई जानता है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बुलंदी के झंडे गाड़े थे। थियटर से बाहर निकलते दर्शकों पर देशभक्ति का जुनून छाया रहता। दर्शकों ने फिल्म की खूब तारीफ की। लेकिन इस फिल्म के बनने से लेकर रिकॉर्डतोड़ सफलता तक कई किस्से जुड़े हुए हैं। तो चलिए बॉलीवुड को नई दिशा देने वाली इस फिल्म के अनसुने किस्सों को बताते हैं।
फिल्म के डॉयरेक्टर आशुतोष गोवरिकर के लिए आमिर जैसे एक्टर को अपनी फिल्म के लिए मनाना बहुत ही मुश्किल काम था। बताया जाता है कि जब पहली बार आशुतोष स्क्रिप्ट लेकर आमिर के पास पहुंचे, तो उन्होंने स्किप्ट सुनते ही फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया था। आशुतोष आमिर के रवैये से वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने नाराज़ होने की बजाय कोशिश जारी रखना जरुरी समझा। गोवारिकर ने फिर से कलम उठाई और स्क्रिप्ट में बदलाव कर आमिर के पास दोबारा गये। एक बार फिर आमिर ने उन्हें इनकार कर दिया था। आशुतोष बार-बार कोशिश करते और हर बार आमिर उन्हें इनकार कर देते। आशुतोष ने भी ठान लिया था कि वह आमिर के साथ ही इस फिल्म को बनायेंगे। उन्होंने सातवीं बार जब स्क्रिप्ट लिखी तो अपना सब कुछ उसमें झोंक दिया था। इस बार उन्हें सफलता मिल गई। आखिरकार आमिर ने फिल्म करने के लिए हां कर दी।
आशुतोष जिस तरह की फिल्म बनाना चाहते थे, उसमें कई करोड़ का खर्चा था। आमिर ने हाँ’ के बाद आशुतोष से सबसे पहले किसी प्रोड्यूसर को ढूंढने को कहा था। उस समय का सिनेमा ऐसी अलग फिल्म नहीं बनाता था। सभी प्रोड्यूसर के लिए यह एक जुए की तरह था। आशुतोष के जूते घिस गए थे, लोगों के दफ्तर जाते-जाते। अंत में आशुतोष को निराश देखकर आमिर ने यह जिम्मेदारी अपने कधों पर ले ली। इस फिल्म के साथ पहली बार आमिर प्रोड्यूसर भी बन गए थे।
लगान एक ‘पीरियड फिल्म’ थी, इसलिए इसकी शूटिंग अगली बड़ी चुनौती थी। आशुतोष चाहते थे कि यह फिल्म बिल्कुल असली जैसी लगे। वह आज के दौर की तरह ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन इसके लिए भी उन्हें एक मोटी रकम लगानी पड़ती, जो फिल्म का बजट बिगाड़ सकती थी। काफी सोच विचार के बाद तय किया गया कि शूट की लोकेशन ओरिजनल ही रखी जायेगी। इसके लिए गुजरात के भुज का चयन किया गया। यह शहर से दूर था। वहां दूर-दूर तक कोई फैसिलिटी नहीं थी। ना तो वहां पर होटल थे और ना ही अच्छी खाने-पीने की जगह थी। इन सब के अलावा चिलचिलाती गर्मी के बीच उन्हें खुले मैदान में शूटिंग करनी थी। यह तो उस गांव के निवासियों की दरियादिली थी कि, उन्होंने पूरे फिल्म क्रू की सहायता में पूरा सहयोग किया। बावजूद इसके सब चीज़ों को सही तरीके से चलाना बहुत ही मुश्किल था, क्योंकि पूरा सेट खुली ज़मीन पर ही था। कहते हैं कि शूटिंग के समय हजारों की गिनती में एक्टर वहां पर थे। करीब 300 भारतीय एक्टर, 15 ब्रिटिश एक्टर और 10,000 लोगों की भीड़ वहां पर थी।
जिस गांव में यह फिल्म शूट हो रही थी उसे ढूंढना भी कोई आसान काम नहीं था। कहा जाता है कि डायरेक्टर ने बहुत जगहें छानी थी, जिसके बाद जाकर यह एक जगह उन्हें पसंद आई थी। सभी एक्टर अपने किरदार में घुस सकें, इसलिए उन सबने कुछ वक़्त गांव के टूटे पुराने मकानों में गुज़ारा, ताकि वह समझ पाएं कि कैसे वहां के लोग एक कठिन जिंदगी जीते थे। शूटिंग के लिए कई एकड़ों की ज़मीन को इस्तेमाल किया गया था। ऐसा लग रहा था मानो कोई नया गांव आकर वहां बस गया हो। छह महीने तक इस फिल्म को वहां शूट किया गया था।
जैसे-जैसे वक़्त गुजरने लगा था दिक्कतों की वजह से एक्टर अपना आपा खोने लगे थे। मुसीबतों के होने के बाद भी अभिनेताओं ने फिल्म को पूरा करने के लिए अपना जी जान लगा दिया था। इस फिल्म से जुड़े हर एक इंसान के लिए यह खास हो चुकी थी।
महीनों की मेहनत के बाद आशुतोष की ‘लगान’ बनकर तैयार हो चुकी थी। बस अब इसके पर्दे पर आने का इंतज़ार था। इस फिल्म से सबकी उम्मीदें लगी हुई थी। 15 जून 2001 को सिनेमा हॉल में लगान के साथ-साथ सनी देओल की ‘ग़दर- एक प्रेम कथा’ भी लगी हुई थी। एक तरफ एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म ‘लगान’ थी, तो दूसरी ओर बंटवारे पर बनी ग़दर। सबको यही उम्मीद थी कि ग़दर के आगे लगान बिल्कुल खड़ी नहीं हो पाएगी। गदर भी बड़ी हिट हुई थी, लेकिन लगान को क्रिटिक्स की काफी तारीफें उसे ख़ास बना रही थीं।
रातों-रात यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक नया परचम लहराने में सफल रही। एक के बाद एक रिकॉर्ड्स की झड़ी लग गई। सिर्फ देश में नहीं, बल्कि विदेशों मंथ भी लगान के चर्चे होने लगे थे। सिनेमा हॉल में जब भी इंडिया के जीतने का सीन आता, तो लोगों की तालियों से पूरा सिनेमा हॉल गूंज उठता था।
देखते ही देखते फिल्म इस तरह आगे बढ़ी कि ऑस्कर जैसे बड़े पुरस्कार के लिए चयनित कर ली गई थी। भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसा तीसरा मौका था, जब कोई भारतीय फिल्म ऑस्कर के लिए भेजी गई थी। लगान पूरी तरह अपनी बुलंदियों पर थी। भारत से निकलकर लगान अमेरिका, जर्मनी, जापान, अफ्रीका जैसे देशों तक पहुंच चुकी थी। हालाँकि, टीम लगान की तमाम मेहनत के बावजूद ऑस्कर पाने से यह फिल्म वंचित रह गयी, लेकिन आमिर खान के प्रयासों ने विश्व भर में भारतीय सिनेमा को एक ख़ास नजरिये से देखे जाने में बड़ी भूमिका निभाई।
लगान एक ऐसी फिल्म है, जिसे बॉलीवुड हमेशा याद रखेगा। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को एक नये आयाम तक पहुंचाने का काम किया। यह एक ऐतिहासिक फिल्म है।

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