जब मिन्नतों से नहीं बनी बात तो भारत ने की 40 घंटे तक बमबारी, फिर पुर्तगालियों ने किया सरेंडर

जब मिन्नतों से नहीं बनी बात तो भारत ने की 40 घंटे तक बमबारी, फिर पुर्तगालियों ने किया सरेंडर

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  • 2017-11-15
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK 18 दिसंबर 1961 से पहले गोवा भारत का हिस्सा नहीं था। इसपर पुर्तगालियों का कब्जा था। पुर्तगाली गोवा को छोड़ने को तैयार नहीं थे। पीएम जवाहर लाल नेहरू की लाख मिन्नतों के बाद भी जब पुर्तगालियों ने गोवा नहीं छोड़ा, तो भारत को मजबूरन रौद्र रूप लेना पड़ा। फिर जो हुआ, वो इतिहास है।
दिन 18 दिसंबर का था, साल 1961 का था। भारतीय सेना ने गोवा बॉर्डर में इंट्री की। फिर शुरू हुई दोनों तरफ से फायरिंग और बमबारी। 30 हजार की भारतीय सेना के सामने 6000 पुर्तगाली टिक नहीं पाए। भारतीय सेना ने जमीनी, समुद्री और हवाई हमले किये। पुर्तगाली बंकरों को तबाह कर दिया गया। भारतीय वायुसेना ने डाबोलिम हवाई पट्टी पर बमबारी की। इससे पुर्तागाली सकते में आ गए। उनको उम्मीद नहीं थी कि शांतिप्रिय भारत उनपर हमला भी कर सकता है। लेकिन जब पुर्तगाली प्यार और समझाने से नहीं माने तो भारत को उग्र रूप धरना पड़ा। भारत की बमबारी के बीच दो पुर्तगाली विमान भागने में कामयाब रहे। लेकिन सिर्फ दो विमान में कितने पुर्तगाली आ पाते। ज्यादातर पुर्तगालियों को भारतीय सेना का सामना करना पड़ा।
 आखिरकार पुर्तगाली सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया। 36 घंटे की बमबारी को पुर्तगाली सह नहीं पाए और उनके गर्वनर जनरल वसालो इ सिल्वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन थापर के सामने सरेंडर कर दिया।
 इस तरह से 19 दिसंबर को भारतीय सेना का ऑपरेशन विजय सफल हुआ और गोवा का भारत में विलय हो गया। उसी दिन गोवा दमन और दीव के साथ केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया। लेकिन आज हम भारतीय सेना के इस शौर्य को क्यों याद कर रहे हैं, क्योंकि आज के दिन ही यानी 30 मई 1987 को गोवा को दमन और दीव से अलग कर दिया गया और पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया। पुर्तगाल में आज भी एक कहावत है कि जिसने गोवा देख लिया उसे लिस्बन (पुर्तगाल की वर्तमान राजधानी) देखने की जरूरत नहीं है।
ऑपरेशन विजय के दौरान मेजर जनरल केपी कैंडेथ को 17 इंफैंट्री डिवीजन और 50 पैरा बिग्रेड की कमान सौंपी गई थी। भारतीय सेना के पास उस वक्त 6 हंटर स्क्वाड्रन और 4 कैनबरा स्क्वाड्रन थे। गोवा अभियान की हवाई कार्रवाई की जिम्मेदारी एयर वाइस मार्शल एरलिक पिंटो के पास थी। भारतीय सेना ने अपने अचूक बमबारी से पुर्तगालियों को गोवा छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया और इस तरह से गोवा भारत का हिस्सा बन गया।
ऑपरेशन विजय में 30 पुर्तगाली मारे गए थे, जबकि 22 भारतीय जवान शहीद हुए थे। इस ऑपरेशन में 57 पुर्तगाली सैनिक जख्मी हुए थे, जबकि जख्मी भारतीय सैनिकों की संख्या 54 थी। इस पूरे ऑपरेशन केदौरान भारत ने 4668 पुर्तगालियों को बंदी बनाया था।
ऐसा नहीं भारत ने गोवा पर अपना अधिकार जमाने के लिए एकाएक हमला कर दिया। भारत इसके लिए पहले कूटनीति तौर पर कोशिश की, लेकिन उसमें उसको सफलता नहीं मिली। पुर्तगाली किसी भी कीमत पर गोवा छोडऩे को तैयार नहीं थे। इसी बीच साल 1961 में दिल्ली में 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया और पुर्तगाल से भारत छोड़ने की मांग की। इसी दौरान 24 नवंबर 1961 को पुर्तगाली सेना ने भारतीय नौसैनिक जहाज पर हमला बोल दिया, जिसमें दो भारतीय जवान शहीद हो गए। फिर क्या था, भारत को मौका हाथ लग गया और भारत ने गोवा पर हमला बोल दिया और गोवा को आजाद करा लिया।

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