पहले पीएम और जननायक पंडित नेहरू की वो कहानियां, जिसमें गुस्सा है, सादगी है और मोहब्बत भी है

पहले पीएम और जननायक पंडित नेहरू की वो कहानियां, जिसमें गुस्सा है, सादगी है और मोहब्बत भी है

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  • 2017-11-14
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को आप-हम सब जानते हैं। लेकिन उनके बारे में कुछ बातें ऐसी हैं, जिसका बहुत कम लोग जानते हैं। जवाहर लाल हमेशा शांत रहने वाले इंसान थे। लेकिन जब उनको गुस्सा आता था, तो उनके सामने कोई नहीं आता था।
पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू एक ईमानदार शख्स थे। उनकी ईमानदारी के चर्चे भी खूब होते थे। उनकी सादगी के भी लोग कायल थे। और सबसे अहम बात उनकी आशिकी को लेकर है, जिसकी चर्चाएं आम थीं। आज भी कभी-कभार उस जमाने की चर्चा हो जाया करती हैं। आइए आपको बताते हैं पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के कुछ ऐसी कहानियां, जिसे सुनकर आप भी कहेंगे कि वाह! क्या इंसान थे पहले प्रधानमंत्री नेहरू।
एक कहानी नेहरू के अहंकारी होने की कहानी है। जिसे खुद चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चूएन लाई बताई थी। लाई ने चीन की यात्रा पर गए श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि मैं खुश्चेव से मिला हूं, मैं चांग काई शेक से मिला हूं, अमेरिकी जनरलों से भी मुलाकात हुई है। लेकिन नेहरू से ज्यादा अहंकारी शख्स मैंने नहीं देखा।
एक बार जवाहर लाल नेहरू और श्रीलंका के पीएम सर जॉन कोटलेवाला खुले मंच पर भिड़ गए। दरअसल बात ये हुई थी कि बांडुंग सम्मेलन में श्रीलंकाई पीएम ने अपने भाषण में कह दिया था कि पोलैंड, हंगरी, बुलगारिया और रोमानिया जैसे देश उसी तरह सोवियत संघ के उपनिवेश हैं, जैसे एशिया और अफ़्रीका के दूसरे उपनिवेश हैं। इससे नेहरू गुस्सा गए। उन्होंने उनसे कहा कि सर जॉन आपने ऐसा क्यों किया? अपना भाषण देने से पहले आपने मुझे क्यों नहीं दिखाया? सर जॉन ने जवाब दिया कि मैं क्यों दिखाता अपना भाषण आपको? क्या आप अपना भाषण देने से पहले दिखाते हैं? इससे उनका गुस्सा और बढ़ गया। लेकिन तब तक इंदिरा गांधी ने उनका हाथ पकड़कर शांत कराया। दूसरी सुबह को सर जॉन ने गरिमापूर्ण ढंग से माफी मांगते हुए कहा कि मेरा मकसद इस सम्मेलन में खलल डालने का नहीं था। बाद में सर जॉन ने अपनी किताब ‘एन एशियन प्राइम मिनिस्टर्स स्टोरी’ में लिखा कि मैं और नेहरू अच्छे दोस्त रहे। मुझे भरोसा है कि उन्होंने मेरी गलती भुला दी होगी।
एक बार नेहरू विदेश मंत्री नटवर सिंह से नाराज हो गए थे। दरअसल बात ये थी कि नेहरू ने नेपाल नरेश को एक चिट्ठी लिखी थी। लेकिन नटवर सिंह ने उसे अपने पास रख ली थी। लेकिन अगले दिन इसको लेकर हंगामा खड़ा हो गया। नेहरू सीधे विदेश सचिव के कमरे में पहुंच गए और पूछा कि नेपाल के नरेश को जो पत्र मैंने लिखा है, क्या आपने देखा है? विदेश सचिव ने कहा कि नहीं, क्योंकि वो पत्र मेरे पास नहीं आया है? विदेश सचिव ने बताया कि वो पत्र नटवर सिंह के पास है। उन्होंने शायद रख लिया है। इसपर नेहरू गुस्सा में आ गए और कहा कि फौरन पुलिस को बुलाई और आलमारी तुड़वाइए और वो पत्र मेरे सामने रखिए। इस घटना के एक हफ्ते तक नटवर सिंह पीएम के सामने नहीं गए।
नेहरू के सुरक्षा अधिकारी रहे रुस्तमजी ने अपनी किताब ‘आई वाज नेहरूज शैडो’ में एक कहानी लिखी है। उनके मुताबिक जब मैं एक बार उनके कमरे में सिगरेट लेने गया तो देखा कि उनका सहायक हरि उनके फटे मोजे की सिलाई कर रहा था। नेहरू को चीजें बर्बाद करने पसंद नहीं था। एक बार नेहरू ने सऊदी अरब की यात्रा पर खुद महल के सभी कमरों की लाइट्स ऑफ की।
एक कहानी उनके बाल काटने को लेकर है। नेहरू के बाल काटने के लिए राष्ट्रपति भवन से एक नाई आया करता था। एक बार नेहरू ने उससे कहा कि हम विदेश जा रहे हैं, तुम्हारे लिये क्या लाएं? नाई ने शर्माते हुए कहा कि सर, कभी-कभार आने में देर हो जाती है। अगर घड़ी ले आएं तो अच्छा होगा। जब नेहरू विलायत से लौटे से उसके लिए घड़ी लेकर आए।
एक बार जब जवाहर लाल नेहरू साउथ एवेन्यू जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी गाड़ी पंक्चर हो गई। दूर से एक सरदार टैक्सी वाले ने देख लिया और अपनी टैक्सी लेकर पहुंच गया। नेहरू बिना किसी की सुने उसकी टैक्सी में बैठ गए। दफ्तर पहुंचकर वो अपनी जेब देखी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं होते थे। टैक्सी वाला बोला कि आप क्यों शर्मिंदा कर रहे हैं? क्या मैं आपसे पैसे लूंगा? अब तो पांच दिनों तक किसी को इस सीट पर बैठाऊंगा भी नहीं।
एक बार मशहूर अभिनेता चार्ली चैपलिन से नेहरू की मुलाकात हुई। चैपलिन ने नेहरू को अपने घर खाने पर बुलाया। और नेहरू को शैंपेन ऑफर किया। लेकिन नेहरू ने कहा कि आपको पता नहीं कि मैं पीता नहीं हूं। चैपलिन ने कहा कि प्रधानमंत्री महोदय, कैसे मुझे मेरी शैंपेन पीने के सम्मान से रोक सकते हैं? नेहरू कुछ कह पाते। इससे पहले ही चैपलिन ने उसके होठों से शैंपेन से भरा गिलास लगा दिया। नेहरू ने गिलास से एक सिप ली और पूरे वक्त तक उस गिलास को अपने बगल में रखे रहे।
जवाहर लाल नेहरू और एडविना के इश्क की कहानियां भी खूब चर्चा में रहती हैं। इसके अलावा सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू से भी नेहरू का करीबी रिश्ता था। कैथरीन फ्रैंक ने अपनी किताब में लिखा कि विजयलक्ष्मी पंडित ने उनको बताया था कि नेहरू और पद्मजा का इश्क सालों तक चला था। नेहरू ने उनसे शादी सिर्फ इसलिए नहीं की, क्योंकि वो अपनी बेटी इंदिरा गांधी का दिल नहीं दुखाना चाहते थे। नेहरू के जीवनीकार एस गोपाल ने ‘सेलेक्टेड वर्क्स’ में उनके पद्मजा को लिखी चिट्ठी प्रकाशित कर दी थी। 1937 में नेहरू ने पद्मजा को लिखा था कि तुम 19 साल की हो और मैं 100 या उससे भी ज्यादा। क्या मुझे कभी पता चल पाएगा कि तुम मुझे कितना प्यार करती हो।
एक बार और नेहरू ने पद्मजा लिखा कि को लिखा कि मैं तुम्हारे बारे में जानने के लिए मरा जा रहा हूं। मैं तुम्हें देखने, तुम्हें अपनी बाहों में लेने और तुम्हारी आंखों में देखने लिए तड़प रहा हूं।

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