पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर, बन गई हॉकी प्लेयर, लड़कों के साथ करना पड़ता था प्रैक्टिस

पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर, बन गई हॉकी प्लेयर, लड़कों के साथ करना पड़ता था प्रैक्टिस

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  • 2017-11-13
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK यह कहानी एक ऐसी खिलाड़ी की है, जो गांव के खेतों से निकलकर शहर पहुंची। पिता का सपना था डॉक्टर बनने का। लेकिन इस लड़की ने हॉकी स्टिक को चुना। देश की इस बेहतरीन खिलाड़ी का नाम सविता पुनिया है। सविता के संघर्ष की पूरी कहानी जानिए।
सविता का जन्म 11 जुलाई 1990 को सिरसा के जोधकां गांव में हुआ था। इनके पिता महेंद्र पुनिया पेशे से फार्मासिस्ट हैं। जबकि मां हाउस वाइफ हैं। सविता का भाई बी-टेक के बाद कंप्यूटर शॉप चलाता है। सविता बचपन से हॉकी खेलती है। शुरू में वो गांव में खेतों में हॉकी खेलती थी। गांव में कोई लड़की खिलाड़ी नहीं थी, इसलिए उनको लड़कों के साथ प्रैक्टिस करनी पड़ती थी। इसमें सविता की चचेरी बहन मंजू पूरी मदद करती थी। लेकिन कमर में दर्द की वजह से दो-तीन साल बाद ही उसको सविता का साथ छोड़ना पड़ा।
पिता पेशे से फार्मासिस्ट थे। इसलिए वो बेटी को डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन उनकी ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। प्राइमरी स्कूल के दिनों में ही हेड मास्टर ने महेंद्र पुनिया से सविता को खेल पर ध्यान देने की सलाह दी। लेकिन सविता के पिता को यह सलाह अच्छी नहीं लगी। पिता ने सविता को पढ़ाई में फोकस करने को कहा।
लेकिन पिता के कहने के बावजूद सविता ने खेलना नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे पिता भी बेटी की इस जिद के आगे झुक गए और उसका हौसला बढ़ाने लगे। आखिरकार पिता ने बेटी सविता को खेल में करियर बनाने की इजाजत दे ही दी। इसके बाद सविता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सविता पुनिया भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा हैं। वो एशिया कप राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई बार बेस्ट गोलकीपर भी चुनी जा चुकी हैं। सविता का टारगेट 2020 में होने वाले ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।
सविता पुनिया ने खेल में कई उपलब्धियां हासिल की है। सविता ने इंटरनेशनल मैचों का शतक पूरा कर लिया है। जब टीम इंडिया ने अक्टूबर 2014 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता तो सविता को बेस्ट गोलकीपर चुना गया। इसके अलावा साल 2009 में प्रथम महिला चैलेंज्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। सविता ने साल 2009 में अंडर-21 जूनियर वर्ल्ड कप में देश की अगुवाई की। बैंकॉक में साल 2008 में एशिया कप में रजत पदक जीता। साल 2013 में वर्ल्ड लीग राउंड-2 में गोल्ड मेडल जीता।

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