सबरीमाला महिला अधिकार का मामला नहीं, केरला में कुछ ऐसे मंदिर हैं, जहां पुरुषों की एंट्री बैन है

सबरीमाला महिला अधिकार का मामला नहीं, केरला में कुछ ऐसे मंदिर हैं, जहां पुरुषों की एंट्री बैन है

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  • 2017-10-13
  • Shashi Kant

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THE HOOK DESK सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर पाबंदी का मामले 5 सदस्यों वाली सैंवैधानिक पीठ को सौंप दिया है। सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल तक की महिलाओं की एंट्री पर बैन है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस नियम का मकसद मासिक धर्म वाली महिलाओं को मंदिर से दूर रखना है। उनके मुताबिक भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे। इसलिए महिलाओं की एंट्री पर बैन है।

महिलाओं ने इस बैन के खिलाफ कोर्ट में अपील की थी और मंदिर में एंट्री की डिमांड की थी। उसके बाद कोर्ट का ये फैसला आया है। इस फैसले की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है। ज्यादातर लोगों ने महिलाओं का समर्थन किया है। जबकि कुछ लोग इस बैन को ठीक भी मान रहे हैं।
एक यूजर ने इसका बचाव किया है और लिखा है कि सबरीमाला मामले को महिला इश्यू के तौर पर गलत पेश किया जा रहा है। केरला में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जहां पुरुषों के जाने पर बैन है।
एक यूजर ने लिखा कि यह सोची-समझी चाल है। यह हिंदुत्व को बर्बाद करने की साजिश है। सबरीमाला मंदिर, जलीकट्टू, दीवाली पर पटाखे, बिना पानी के होली, दही हांडी।
एक यूजर ने लिखा कि महिलाओं आपको पूजा करना है ये बताया पंडित ने। आपको पूजा यहां नहीं करना है ये भी बताया पंडित ने। सेकुलर नास्तिक कौन होते हैं?
एक यूजर ने सीधे-सीधे इसके लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराया है और लिखा है कि मैं कभी भी मोदी को वोट नहीं दूंगा।
एक यूजर ने सवाल उठाया कि सारे बैन महिलाओं पर ही क्यों?
संवैधानिक पीठ इस मामले में छह सवालों पर विचार करेगी। इसमें लैंगिक भेदभाव के आधार पर इस प्रथा पर रोक लगाने और आस्था की आजादी का मुद्दा शामिल है. इसके अलावा संवैधानिक पीठ इस सवाल पर विचार करेगी कि क्या यह प्रथा हिंदू धर्म का अभिन्न अंग है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल देने का हक नहीं है। इसके साथ इस सवाल पर भी विचार करेगी कि 1991 में केरल हाई कोर्ट द्वारा इस पाबंदी को सही ठहराने वाले फैसले को जारी रखा जा सकता है या नहीं? इसमें यह मुद्दा भी शामिल है कि अगर किसी मंदिर का प्रबंधन वैधानिक समिति के हाथ में है तो वह नैतिक मान्यताओं के आधार पर फैसला कर सकती है या नहीं?

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