सारागढ़ी युद्ध में जब 21 सैनिकों ने चटा दी थी 12 हजार अफगानी सैनिकों को धूल..

सारागढ़ी युद्ध में जब 21 सैनिकों ने चटा दी थी 12 हजार अफगानी सैनिकों को धूल..

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  • 2017-10-13
  • niharika

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 Thehook desk : सारागढ़ी का युद्ध भारतीय इतिहास की वो घटना है जिस पर समस्त सिक्ख संप्रदाय गर्व करता है और ये घटना हर हिंदुस्तानी के लिए भी गर्व की बात है। इसमें 21 सिक्ख सैनिकों ने सारागढ़ी पोस्ट को बचाने के लिए 12 हजार अफगानी सैनिकों से अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी ! सुनने में ऐसा लगता है कि ये सिर्फ कहानी है लेकिन ये कहानी एक हकीकत है। 
सारागढ़ी युद्ध की कहानी शुरू होती है साल 1897 में। सारागढ़ी नामक स्थान पर ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 36वीं सिख बटालियन के 21 सिख सिपाही तैनात थे। 12 सितंबर 1897 को अफगानों ने इस पोस्ट पर आक्रमण करने का मन बनाया। उन्हें लगा कि यहां पर सिर्फ 21 सैनिक मौजूद है जो हमारे 10 से 12 हजार सैनिकों के सामने नहीं टिक पाएंगे लेकिन ये उनकी भूल थी।
जब युद्ध शुरू हुआ तो अफगान सैनिक अपने हथियारों के साथ सिख सैनिकों पर टूट पड़े। उन 21 सैनिकों ने अफगानी सैनिकों को ऐसा मज़ा चखाया कि उनके होश उड़ गए। सिख सैनिकों ने अपने साहस और पराक्रम से 600 से अधिक अफगान सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। सैनिकों के पास जब तक बंदूकों में गोली थी तब तक वे बंदूकों से लड़े। जब ये खत्म हो गए तो वे तलवार लेकर मैदान में उतर आए।सिखों ने इस युद्ध में अपनी जान की परवाह नहीं की और अपनी अंतिम सांस तक लड़े और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। 21 सैनिकों का अफगानी सैनिकों से ये महायुद्ध इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हालांकि इस युद्ध में सिख सैनिकों को अफगानी सैनिकों से हार का सामना करना पड़ा था और उन्होंने कब्जा भी कर लिया था।लेकिन ऐन मौके पर ब्रिटिशों ने अपनी सेना भेजकर वहां से अफगानी सैनिकों को भगा दिया और कब्जा कर लिया। इस तरह सारागढ़ी भारतीय सैनिकों के हाथ में ही रहा। इस युद्ध के अंत में 21 सैनिक शहीद हुए थे और 600 अफगानी सैनिक मारे गए थे। इस युद्ध में अफगानी सेना को बहुत बड़ी हानि उठानी पड़ी थी।
उन महान 21 सैनिकों को मरणोपरांत ब्रिटिश साम्राज्य की तरफ से बहादुरी का सर्वोच्च पुरस्कार ‘इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार आज के परमवीर चक्र के बराबर है। 12 सितंबर को ‘सारागढ़ी दिवस’ घोषित किया गया जिसे आज भी ब्रिटेन और इंग्लैंड में हर साल मनाया जाता है। भारत में भी सिख रेजीमेंट इसे रेजीमेंटल बैटल ऑनर्स डे के रूप में मनाती है।

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