इंसानी नफरत से बर्बाद हुए कई ऐतिहासिक धरोहर, बामियान से लेकर सीरिया के बालशामिन मंदिर तक

इंसानी नफरत से बर्बाद हुए कई ऐतिहासिक धरोहर, बामियान से लेकर सीरिया के बालशामिन मंदिर तक

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  • 2017-09-13
  • Shashi Kant

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दुनिया में ऐतिहासिक स्मारकों की भरमार है। दुनिया के हर कोने में कोई ना कोई ऐतिहासिक धरोहर है। इसके जरिए हम अपनी विरासत को जानते हैं। इसमें मानव संस्कृति की झलक होती है। लेकिन एक छोटी सी गलती या उन्मादी सोच के चलते हम इन धरोहरों को खो देते हैं। तो चलिए हम आपको ऐसे ही कुछ ऐसे धरोहरों के बारे में बताते हैं, जिनको हमने अपनी गलती से खो दिया।
बामियान-

अफगानिस्तान के बामियान में महात्मा बुद्ध की 174 फीट लंबी मूर्ति थी। लेकिन साल 2001 में तालीबानी आतंकियों ने इसको सिर्फ इसलिए तोड़ डाला क्योंकि ये इस्लाम से जुड़े हुए नहीं थे। 1500 साल से अधिक समय से खड़ी ये मूर्तियां पूरी दुनिया में मशहूर थीं। यूनेस्को ने इन्हें वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तहत सूचीबद्ध किया हुआ था। लेकिन एक उन्मादी सोच ने इस ऐतिहासिक धरोहर को हमसे छीन लिया।
नालंदा-

पटना से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित नालंदा विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था। यहां देश-विदेश से छात्र पढ़ने आते थे। इस भव्य विश्वविद्यलय में महावीर और गौतम बुद्ध भी आ चुके हैं। 5वी शताब्दी में बना नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म के खत्म होने और इस्लाम के बढ़ने की वजह से अपना अस्तित्व खोने लगा और आखिरकार बख्तियार खिलजी ने इसी पूरी तरह बर्बाद कर दिया।
बालशामिन मंदिर-

इसका निर्माण 17वीं सदी में हुआ था और रोम के सम्राट हादरियान ने 130 सदी में इसका प्रचार प्रसार किया था। बाल शामिन मंदिर को यूनेस्को ने चिह्नित किया था। यह सीरियाई शहर पलमायरा में था। लेकिन दमिश्क में इस्लामिक स्टेट के जिहादियों ने 2015 में इस प्राचीन मंदिर को विस्फोटकों से उड़ा दिया था।
निमरुद-

इराक के मोसुल शहर के दक्षिण में स्थित ऐतिहासिक शहर निमरुद पुरातात्विक और सांस्कृतिक सभ्यता की निशानी थी। निमरुद शहर करीब 3 हजार साल से भी पुराना था और मेसोपोटामिया सभ्यता की मिसाल थी। यह शहर 1250 ईसा पूर्व बसाया गया था, लेकिन आतंकियों ने इराक के मोसुल में 3 हजार साल पुराने ऐतिहासिक शहर निमरुद को तबाह कर दिया।
हाउस ऑफ विजडम-

बगदाद का हाउस ऑफ विजडम बायत अल-हिकमा के नाम से भी जाना जाता है। यह उस समय बुद्धिजीवियों का बड़ा केंद्र था। इसकी स्थापना कैलिफ हारुन अल-रशीद ने ईसा पूर्व 9वीं शताब्दी में की थी। लाइब्रेरी में विभिन्न धर्मों के किताबों का बहुत बड़ा कलेक्शन है। ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को मंगोलों ने 1258 में तबाह कर दिया।
एलेक्ज़ेंड्रिया लाइब्रेरी-

ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में एलेक्ज़ेंड्रिया लाइब्रेरी को टॉलेमी आई सोटर ने बनाया था। इस समय यहां 40,000 से लेकर 4,00,000 तक प्राचीन पुस्तके थीं। विभिन्न विषयों पर दुनिया के कोने-कोने से पुस्तकें इकट्ठा करके यहां रखी गई थीं। जूलियस सीज़र, रोमन सम्राट ऑरेलियन, अलेक्जेंड्रिया के पोप थियोफिलस आदि ने धीरे-धीरे इसे नष्ट कर दिया गया।
पार्थेनन-

पार्थेनन अथीनियान एक्रोपोलिस पर एक मंदिर है। यह मंदिर ग्रीस में यौवन की देवी एथेना को समर्पित है। इसे एथेंस के लोग अपने संरक्षक देवता मानते हैं। इस मंदिर का निर्माण 447 ईसा पूर्व में शुरू हुआ। भवन की सजावट 432 ईसा पूर्व तक जारी रही। हालांकि यह 438 ई.पू. में पूरा किया गया। यह प्राचीन यूनान की सबसे महत्वपूर्ण इमारत है। 480 ईसा पूर्व फारसी आक्रमणकारियों ने इसे नष्ट कर दिया था।

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