21 साल में सरपंच, गांव में की शराबबंदी, महिलाओं का बनाया ग्रुप, चलाया सफाई अभियान

21 साल में सरपंच, गांव में की शराबबंदी, महिलाओं का बनाया ग्रुप, चलाया सफाई अभियान

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  • 2017-09-12
  • Shashi Kant

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यह कहानी एक ऐसी लड़की की है, जो सिर्फ 21 साल की उम्र में सरपंच बन गई और गांव की पूरी तस्वीर बदल दी। इस युवा सरपंच ने अपने पंचायत में शराबबंदी कर दी। इतना ही नहीं, दूसरी पंचायतों में भी शराबबंदी को लागू कराया।

इस युवा सरपंच का बचपन मुश्किलों भरा बीता। उनके माता पिता की आर्थिक हालात ऐसी नहीं थी कि वो अपनी बेटी की ठीक से परवरिश भी कर सकें। इसलिये उनके चाचा ने उनको गोद ले लिया। वो कुछ अलग हटकर करना चाहती थीं इसलिये वो पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकार बन गईं और समाज के सामने बड़ी बेबाकी से गांव की समस्याओं को रखने लगी। उनकी यही बेबाकी उन्हें सियासत में ले आई।

इस तरह केवल 21 साल की उम्र में जबना चौहान हिमाचल प्रदेश के मंडी की थर्जुन पंचायत की सरपंच बनकर देश की सबसे युवा सरपंच बन गई। ये उनकी अकेली उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन्होने सरपंच बनकर वो काम किया, जिसकी लोग आज मिसाल दे रहे हैं। उन्होने ना केवल अपनी पंचायत में, बल्कि दूसरी पंचायतों में भी शराबबंदी को लागू किया। अब उनकी ये मुहिम हिमाचल प्रदेश के दूसरे जिलों में भी शुरू होने वाली है। इतना ही नहीं उन्होने एक ऐसी प्रथा को भी बदलने के काम किया जो सदियों से चल रही थी। जबना ने मंडी के प्रसिद्ध लम्बोदरी माता मंदिर में चढ़ाई जाने वाली शराब पर रोक लगाई।

हिमाचल प्रदेश के केलोधार इलाके से 12वीं करने के बाद जबना के परिवार वालों ने उन्हें अपनी गरीबी के कारण आगे पढ़ाने से मना कर दिया। तब उनके चाचा रमेश यादव ने उन्हें गोद लेकर ग्रेजुएशन करने में मदद की। ग्रेजुएशन के दौरान ही वो दो स्थानीय अखबारों के लिए रिपोर्टिंग का काम भी करने लगी। उन्होंने गांव और पंचायत की समस्याओं को प्रमुखता से प्रशासन के सामने रखा। इस दौरान उनके गांव में सरपंच पद के लिये चुनावी सरगर्मियां शुरू हुई और ये पहली बार था कि ये सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई थी। अपने चाचा के कहने पर जबना ने भी इस सीट पर सरपंच के पद के लिये अपना आवेदन कर दिया। हालांकि इस सीट से सियासत से जुड़ी 4 दूसरी महिलाएं भी चुनाव लड़ रही थीं, लेकिन जबना ने अपने अनूठे प्रचार से इस चुनाव को जीत लिया। चुनाव जीतने के बाद जबना ने सबसे पहले उस मुद्दे पर प्रहार किया जो हमारे समाज को घुन की तरह खा रहा है और वो था शराब से जुड़ा मुद्दा। सरपंच बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपनी पंचायत को नशामुक्त बनाया है।

ऐसा नहीं है कि उनका इसमें विरोध नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने इसके लिए भी रास्ता निकाल लिया। पहले उन्होंने गांव की 250 महिलाओं का वॉट्सअप ग्रुप बनाया। जिसका मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना था।

सरपंच चुने जाने के करीब 7 महीने काम करने के बाद जबना ने पंचायत की आम बैठक बुलाई। उसमें प्रस्ताव पास किया गया कि सार्वजनिक जगहों पर कोई भी व्यक्ति ध्रूमपान या शराब पीते हुए मिला तो उसे 5 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। साथ ही शादी ब्याह या किसी तरह के दूसरे आयोजन में शराब परोसने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जबना ने इस काम के बाद एक ऐसा काम किया, जिसे करने के लिये काफी हिम्मत की जरूरत होती है।

हिमाचल प्रदेश के मंडी के प्रसिद्ध लम्बोदरी माता मंदिर में सदियों से शराब की धार दी जाती थी। इस साल 30 जून को पहली बार उनको शराब की जगह घी की धार दी गई। इसका प्रस्ताव वहां की ग्राम सभा ने पास किया था, लेकिन इस काम की पहल जबना ने ही की थी।

उनकी इस उपलब्धि के बाद धीरे-धीरे नशाबंदी की मुहीम आज पूरे हिमाचल प्रदेश में चल रही है। मंडी की 432 पंचायतों में से करीब करीब सभी पंचायतों ने अपने यहां नशाबंदी लागू कर दी है। केवल 12-13 पंचायतें ऐसी हैं जिन्होने इस बारे में अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। वहीं शिमला, ऊना, हमीरपुर जिलों में भी जल्द ही नशाबंदी का ये काम शुरू होने वाला है। यही वजह है कि उनके इस काम की तारीफ हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी की। साथ ही पंजाब सरकार ने उनकी नशाबंदी काम के लिए उनको सम्मानित किया। हाल ही में गुजरात में भी सरपंचों के सम्मेलन में उनको सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन में उन्हें सशक्त नारी अवार्ड से नवाजा गया।

शराबबंदी के अलावा जबना स्वच्छ भारत मुहीम के साथ भी जुड़ी हैं। उन्होने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिये एक वाट्सएप ग्रुप बनाया। जिसके जरिये वो लोगों को स्वच्छता से जुड़ी जानकारी देती हैं। करीब ढाई हजार की आबादी वाली उनकी पंचायत में 5 वार्ड आते हैं। इन सभी वार्डों में उन्होने अलग-अलग महिला मंडल बनाये। इन महिला मंडल के साथ उन्होने इलाके के युवाओं को भी जोड़ा है। ये मंडल महीने में एक दिन गांव की सफाई करता है। साथ ही वहां मौजूद स्कूल में पानी की टंकियों और पानी के स्रोतों को साफ करने का काम करता है। वहीं दूसरी ओर उनकी पंचायत के ज्यादातर घरों में शौचालय तो बने थे, लेकिन पानी की निकासी का सही इंतजाम नहीं था। इस वजह से घर से निकलने वाला गंदा पानी सड़क और गलियों में ऐसे ही बहता रहता था। तब जबना ने यहां पर पहले कच्चे और बाद में पक्के शोकपीट बनाये।

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