‘तुम्हारा नाम क्या है बसंती?...' सुना है आपने, लेकिन क्या 'शोले' के ये डायलॉग्स जानते हैं?

‘तुम्हारा नाम क्या है बसंती?...' सुना है आपने, लेकिन क्या 'शोले' के ये डायलॉग्स जानते हैं?

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  • 2017-08-02
  • Shashi Kant

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साल 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ बॉलीवुड में मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म ने कई सारे रिकॉर्ड्स बनाए। इस फिल्म में एक से बढ़कर एक डायलॉग्स हैं। इन डायलॉग्स में ज्यादातर ऐसे हैं, जिनको आप भी बोलते हैं। लेकिन इन फिल्म के सारे डायलॉग्स को आप नहीं जानते हैं।

फिल्म ‘शोले’ के उन सदाबहार डायलॉग्स के बारे में हम आपको बताते हैं, जिनको बॉलीवुड का दर्शक तक भी बोलता था और आज भी ये दर्शकों की जुबां पर आ ही जाता है। 

अमिताभ बच्चन यानि जय का डायलॉग- तुम्हारा नाम क्या है बसंती?
जब वीरू पानी की टंकी पर चढ़ता है तो जय कहता है- घड़ी-घड़ी ड्रामा करता है साला
गब्बर जब बसंती को नाचने के लिए कहता तो वीरू कहता है- बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना।
गब्बर का डायलॉग- जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांसे चलेगी... तेरे पैर रूके तो ये बंदूक चलेगी
ठाकुर यानि संजीव कुमार जब कहते हैं कि ये हाथ नहीं... फांसी का फंदा है।
जब ठाकुर कहता है- सांप को हाथ से नहीं... पैरों से कुचला जाता है।
जब ठाकुर जय और वीरू से अपना काम करने के लिए कहता है- कीमत जो तुम चाहो... काम जो मैं चाहूं।
गब्बर का ये डायलॉग हर दर्शक बोलते हुए सिनेमा घर से बाहर निकलता था- अरे ओह साम्भा... कितना इनाम रखे हैं सरकार हम पर?
जब गब्बर कहता है- गब्बर का ताप से तुम्हें एक आदमी बचा सकता है, एक ही आदमी... खुद गब्बर
गब्बर कहता है- अब तेरा क्या होगा कालिया?
जब बसंती कहती है- चल धन्नो... आज तेरी बसंती की इज्जत का सवाल है।
जेलर का ये डायलॉग बच्चे-बच्चे की जुबान पर रहा- आधे इधर जाओ... आधे उधर जाओ... और बाकी हमारे साथ आओ।
जेलर कहता है- हमारे जासूस इस जेल में चारों तरफ फैले हुए हैं।

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