बिहार में बना है क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का मंदिर

बिहार में बना है क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का मंदिर

THE HOOK DESK : मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करते हैं। उसमें ऐसे सराबोर हो जाते हैं कि कुछ पलों के लिए दुनिया के तमाम कष्टों, चिंताओं को मिटा देते हैं।
  • 2017-06-19
  • Ritesh Kumar

THE HOOK DESK : मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करते हैं। उसमें ऐसे सराबोर हो जाते हैं कि कुछ पलों के लिए दुनिया के तमाम कष्टों, चिंताओं को मिटा देते हैं।

हम अपने आराध्य की स्तुति करते हैं सब कुछ (अपनी परेशनियां) उसी पर छोड़ देते हैं। सही मायने में मंदिर इंसानी जीवन की व्याकुलताओं के लिए बनाए गए आध्यात्मिक चिकित्सालय की भूमिका निभाते हैं जहां कुछ ही पलों की श्रद्धा, आस्था हमारे मन को कम से कम 24 घंटों के लिए रिलीफ टॉनिक प्रदान करती है।
 
आपने सभी देवी देवताओं का मंदिर देखा होगा और रोज पूजा भी करते होंगे लेकिन क्या आपको पता है देश के कुछ जगह पर बॉलीवुड और नेताओं के मंदिर भी हैं? नहीं मालूम ना लेकिन ऐसा है।
एक और अहम बात यह है कि जिस देश में क्रिकेट को एक खेल नहीं बल्कि एक अलग ही तरीके से लोग देखते हैं और इस खेल में एक शख्सियत सचिन तेंदुलकर को लोगों ने भगवान तक का दर्जा दे चुके हैं। 
सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान कहे जाते हैं और देश में उनका भी एक मंदिर है। आपको जानकर हैरानी होगी कि बीजेपी नेता और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने सचिन तेंदुलकर का मंदिर बनवाया है। बिहार में बने सचिन के मंदिर में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और धांकड़ बल्लेबाज युवराज सिंह की प्रतिमाएं भी लगी हैं।
मनोज तिवारी ने बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में तेंदुलकर के मंदिर का निर्माण करवाया है ।मनोज तिवारी का मानना है कि यह मंदिर सचिन को सम्मान देने के साथ नए खिलाड़ियों को उनके जैसा बनने की प्रेरणा भी देता है। मंदिर 6 हजार वर्ग फीट के परिसर में बना है‍‍। सचिन तेंदुलकर की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित है, जबकि साथी खिलाड़ी आस-पास के हिस्से में हैं।
सचिन की मूर्ति पांच फुट तीन इंच की है, जो संगमरमर की है। इस आदमकद मूर्ति में सचिन इंडियन क्रिकेट टीम की आधिकारिक ब्लू जर्सी में हैं। उनके हाथ में वर्ल्‍डकप है। सचिन की मूर्ति तैयार को राजस्थान के मूर्तिकार ने बनाया है। सचिन की मूर्ति को 15 फीट उंचे चबूतरे पर स्थापित किया गया है। मूर्ति पर मौसम का प्रभाव न पड़े इसके लिए व्यवस्था की गई है।

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