न्याय का मजाक: कोर्ट में 77 लोगों के हत्यारे ने दी नाजी सलामी

THE HOOK DESK :  नार्वे की राजधानी ओस्लो के जिला न्यायालय में एक कैदी जिसने कई लोगों को मौत के घाट उतारा है उसके ऊपर अमानवीय व्यवहार को लेकर मौजूदा सरकार के द्वारा एक अपील की सुनवाई के दौरान एक अजीब सा वाक्या घटित हुआ। कैदी ने न्यायालय में प्रवेश करने के
  • 2017-01-11
  • Ruby Sarta

THE HOOK DESK : नार्वे की राजधानी ओस्लो के जिला न्यायालय में एक कैदी जिसने कई लोगों को मौत के घाट उतारा है उसके ऊपर अमानवीय व्यवहार को लेकर मौजूदा सरकार के द्वारा एक अपील की सुनवाई के दौरान एक अजीब सा वाक्या घटित हुआ। कैदी ने न्यायालय में प्रवेश करने के

कैदी के ऊपर लगभग 77 लोगों की हत्या का आरोप है। इस 37 वर्षीय दक्षिणपंथी अतिवादी जिसने सामूहिक हत्याएं की है उसका नाम एंडर्स ब्रेविक है। एंडर्स न्यायालय में एक काले सूट में सज धज कर दाढ़ी के साथ पेश हुआ। एंडर्स को स्काइन के टेलीमार्क जेल में  साल 2011 में 77 लोगों की हत्या के आरोप में कैद की सजा सुनाई गई थी। एंडर्स बम और गोलीबारी करते हुए इतने लोगों को मौत की निंद सुला दिया था।
एंडर्स ने कोर्ट रुम में प्रवेश करते ही वहां बैठे पत्रकारों को एक नाजी सलामी दे दी लेकिन बात नहीं की। एंडर्स ने  सरकार पर मुकदमा दायर किया है कि उसके साथ जेल में अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उसने एकान्त कारावास की मांग की थी लेकिन उसे जेल में शुरुआती दिनों में हाथों में हथकड़ी के साथ बंद किया गया था जो कि उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है।
सरकार ओस्लो जिला न्यायालय में एंडर्स के दावे 'मानवाधिकार उल्लंघन' के खिलाफ कोर्ट में एक अपील कर रही है। कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था कि 331,000 क्रोनर (£ 32,000) एंडर्स को दिए जाएं क्योंकि उसके साथ जेल में दुर्व्यवहार हुआ है। 
इस पर सरकार का कहना है कि एंडर्स के साथ जो हुआ है वो एक लोकतांत्रिक समाज में एक मौलिक मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। यहां यह नहीं देखा गया कि वो आतंकवादी है या हत्यारा। हमारी सरकार दोनों में कोई भेदभाव नहीं करती है।
आपको बता दें कि एंडर्स ने 2012 में बड़े पैमाने पर हत्या और आतंकवाद का दोषी पाया गया है और उसे 21 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। तर्क में यह कहा गया था कि ये समाज के लिए एक खतरा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ये सजा पूरे जीवन भर जेल में तब्दिल मानी जाएगी। 
एंडर्स ने यह मांग की थी उसे तीन-सेल वाले कमरे में रखा जाए जहां वह वीडियो गेम खेल सके साथ ही टीवी देख सके और व्यायाम कर सके। साथ ही एंडर्स ने जेल में दी जाने वाली भोजन की गुणवत्ता के बारे में शिकायत की और कहा था कि मुझे प्लास्टिक के बर्तन में खाना दिया जाता है और किसी से बात भी नहीं करने दिया जाता है।
सरकार ने उसकी शिकायतों को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि उसके अपराधों की गंभीरता के बावजूद उसके साथ नम्रता से पेश आ रहे हैं और उसे सुरक्षा कारणों के लिए अन्य कैदियों से अलग किया गया है।
एंडर्स ने साल 2011 में 22 जुलाई के हमलों की योजना बनाई थी। उसने ओस्लो में सरकार के मुख्यालय के बाहर एक कार में बम सेट कर दिया था। विस्फोच में आठ लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हो गए थे। 
इस घटना के बाद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने से पहले एंडर्स एक पुलिस की वर्दी में सजे 25 मील की दूरी पर युटोया के द्वीप पर चला गया जहां वह वामपंथी लेबर पार्टी की युवा शाखा की वार्षिक ग्रीष्मकालीन शिविर पर गोलीबारी करने लगा था। वहां 69 लोग मारे गए थे उनमें से अधिकांश किशोर थे। 
हमलों के समय एंडर्स यूरोप में एक मुस्लिम विरोधी क्रांति की साजिश रचने के लिए एक गुप्त सैन्य ईसाई आदेश के कमांडर होने का दावा किया था। लेकिन अब एक पारंपरिक नव नाजी जो वाइकिंग भगवान ओडिन की प्रार्थना करते हैं उसके रूप में खुद का वर्णन करने लगा है। वह अपने मानवाधिकारों के मामले में पिछले साल के शुरू में पत्रकारों के लिए एक नाजी सलामी बन गया है।
इस मामले की सुनवाई फरवरी में होने की उम्मीद है। तब तक के लिए एंडर्स को दक्षिणी नार्वे के स्काइन जेल में रखा जाएगा।

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