SCIENCE ने खोला तीसरी आंख होने के पीछे का बहुत बड़ा राज

SCIENCE ने खोला तीसरी आंख होने के पीछे का बहुत बड़ा राज

THE HOOK DESK : भगवान शिव सबकी मनोकामना पूरी करने के साथ ही विनाश करने वाले देवता भी माने जाते हैं। माना जाता है कि उनकी तीसरी आंख खुलती है तो बहुत ज्यादा विनाश होता है। आइए जानते हैं तीसरी आंख के पीछे का राज।
  • 2017-01-11
  • sajan chauhan

THE HOOK DESK : भगवान शिव सबकी मनोकामना पूरी करने के साथ ही विनाश करने वाले देवता भी माने जाते हैं। माना जाता है कि उनकी तीसरी आंख खुलती है तो बहुत ज्यादा विनाश होता है। आइए जानते हैं तीसरी आंख के पीछे का राज।

भगवान शिव के मस्तक के मध्य में तीसरी आँख भी होती है। माना जाता है कि जब भोलेनाथ क्रोधित होते हैं तब अपनी तीसरी आँख खोल लेते हैं और अपराधी का विनाश कर देते हैं। लेकिन भगवान शिव की तीसरी आँख होने का यह कारण नहीं है। तो फिर इसका क्या कारण है? आइये जानते हैं।  तीसरी आँख एशिया और भारत की कई अन्य संस्कृतियों में भी तीसरी आँख को मान्यता दी गयी है। आध्यात्मिक शक्ति के अलावा इसे आलौकिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन आपको क्या लगता है, यह सिर्फ देवताओं में ही होती है या इसका इंसान से भी इनका कोई नाता है।
pineal ग्लैंड को माना जाता है तीसरी आँख का प्रतीक मनुष्यों में तीसरी आँख होती है या नहीं इस बारे में कई थ्योरियां देखने को मिलेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार सबसे रोचक थ्योरी है "मनुष्य के मस्तिष्क के मध्य हिस्से में स्थित pineal ग्लैंड को तीसरी आँख का प्रतीक मानना।" यह चावल के दाने के आकार की होती है। इस ग्लैंड की कुछ विशेषताएं मनुष्य की आँखों की तरह होती है। हालाँकि यह ग्लैंड दिमाग के दोनों गौलार्धों के ठीक मध्य में स्थित होती है, लेकिन इसकी कुछ विशेषताएं मनुष्य की आँख के समान प्रतीत होती है। Pineal ग्लैंड मेलाटोनिन हॉर्मोन का स्त्राव करती है, जो 'स्लीप और वेक साइकिल' को मैनेज करता है। 
चूँकि यह लाइट सेंसेटिव भी होती है, इसलिये इसे तीसरी आँख भी माना जाता है। इसके साथ ही इसे एनलाइटमेंट से जोड़कर भी देखा जाता है। कुछ विशेषज्ञ इसे आध्यात्मिक और भौतिक दुनिया के बीच का संबंध सूत्र भी मानते हैं। तीसरी आँख दिखाती है अनदेखा विशेषज्ञों का मानना है कि हमारी दोनों आँखों से हम अपने आस-पास की वस्तुओं को देखते हैं, पर यह तीसरी आँख हमें वो दिखाती है जो हम आमतौर पर नहीं देख पाते। कुछ सिद्धान्तों के अनुसार प्राचीनकाल में मनुष्य की भी तीसरी आँख हुआ करती थी। लेकिन धीरे-धीरे जब मनुष्य का विकास हुआ तो धीरे-धीरे यह आँख भी अंदर धंस गयी और pineal ग्लैंड के रूप में विकसित हुई।

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