सैफ अली खान की सास जिसे देखकर घर में छुप जाते थे मुसलमान

THEHOOK DESK: अगर आप सैफ अली खान के परिवार को बांरिकी से जानते हो। तो इस परिवार की दंबगई लेडी से अंजान नहीं होंगे। वक्त जरूर बदल गया है कि लेकिन इन मोहतरमा की दबगंई आज भी उसी तरह है जैसे पहले हुआ करती थी।
  • 2016-12-31
  • Tara Chand

THEHOOK DESK: अगर आप सैफ अली खान के परिवार को बांरिकी से जानते हो। तो इस परिवार की दंबगई लेडी से अंजान नहीं होंगे। वक्त जरूर बदल गया है कि लेकिन इन मोहतरमा की दबगंई आज भी उसी तरह है जैसे पहले हुआ करती थी।

 फिल्म अभिनेता सैफ अली खान और की पहली पत्नी अमृता सिंह की मां एक दंबग लेडी के नाम से पहचानी गई थी। अमृता सिंह की मां रुखसाना सुल्ताना की दबंगई का आलम यह था कि लोग उनके इलाके में आने की खबर सुनकर भाग खड़े होते थे। रुखसाना सुल्ताना एक सामाजिक कार्यकर्ता से राजनीति के क्षेत्र में आई थी।
पेशे से डॉक्टर रूखसाना अपनी बेबाक बातों और दबंग स्टाइल के चलते राजनीति के उस समय के सबसे ताकतवर शख्स संजय गांधी से जुड़ गई। जब रुखसाना सुल्ताना संजय गांधी की टीम में शामिल हुई उस समय देश में आपातकाल का दौर चल रहा था। इसलिए संजय गांधी ने उस समय के अपने चर्चित का कार्यक्रम नसबंदी की जिम्मेंदारी दिल्ली में उनकों सौंप दी।
संजय गांधी ने उस समय रूखसाना को मुस्लिम समुदाय के लोगों को ज्यादा तादाद में नसबंदी के लिए राजी करने का काम सौंपा था। इसके लिए रूखसाना ने पुरानी दिल्ली में गलियों और घर घर जाकर लोगों को परिवार नियोजन के फायदों के बारे में समझाने लगीं।
रुखसाना सुल्ताना ने नसबंदी के लिए पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में कैंप लगवाकर संजय गांधी के परिवार नियोजन को सफल बनाने की मुहिम शुरू कर दी। लेकिन राजनीतिक दलों के साथ मुस्लिम उलेमाओं और इमामों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।संजय गांधी ने इसको अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़ दिया। और फिर हुआ रुखसाना सुल्ताना के नेतृत्व में वह दौर जिसका खौफ आज भी इलाके की गलियों में आज भी महसूस किया जा सकता है।
टारगेट पूरा करने के लिए दवाब बनाया जाने लगा तो जामा मस्जिद के आसपास चलने वाले नसबंदी कैंपों में लोगों को जबरदस्ती पकड़कर उनकी नसबंदी की जाने लगी। बुजुर्गों से लेकर नौजवानों तक को नहीं बख्शा गया। आलम यह था कि जब रुखसाना सुल्ताना अपनी गाड़ी से पुरानी दिल्ली के इलाकों में दौरा करती थी तो उनके डर से अपने घर छोड़कर भाग खड़े होते थे।
मुस्लिमों के नसबंदी विरोध को संजय गांधी ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर इसे किसी भी कीमत पर सफल बनाने के लिए दवाब बनाना शुरू कर दिया। कुछ दिनों में स्थिति यह हो गई थी कि रूखसाना लोगों के सपने में आकर उनकों डराने लगी। ऐसा नहीं था कि रुखसाना को सामाजिक कार्य का कोई अनुभव था या वे डॉक्टर थीं।इससे पहले वे दिल्ली में अपना एक बुटीक चलाती थीं। उनकी मां जरीना बीकानेर रियासत के मुख्य न्यायाधीश मियां अहसान उल हक की बेटी और चर्चित अभिनेत्री बेगम पारा की बहन थीं।
आपातकाल के बाद जब जनता पार्टी की सरकार आई तो रुखसाना नेपथ्य में चली गईं। इसके बाद उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं सुना गया। वहीं दुबारा उनका नाम 1983 में तब चर्चा में आया जब उनकी बेटी अमृता सिंह की पहली फिल्म बेताब रिलीज हुई थी। इसके बाद से उनके बारे में फिर कुछ और सुनने में नहीं आया।

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