इस मंदिर में पाकिस्तान ने गिराए 500 बम, एक खरोंच तक नहीं आई

इस मंदिर में पाकिस्तान ने गिराए 500 बम, एक खरोंच तक नहीं आई

THE HOOK DESK: तनोट माता का मंदिर JAISALMER से करीब 130 KILOMETER दूर INDIA-PAKISTAN BORDER के पास है। यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। वैसे तो यह मंदिर सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है पर 1965 की INDIA-PAKISTAN WAR के बाद इसे चमत्कारी मंदिर माना जाने लगा
  • 2016-12-23
  • Ruby Sarta

THE HOOK DESK: तनोट माता का मंदिर JAISALMER से करीब 130 KILOMETER दूर INDIA-PAKISTAN BORDER के पास है। यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। वैसे तो यह मंदिर सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है पर 1965 की INDIA-PAKISTAN WAR के बाद इसे चमत्कारी मंदिर माना जाने लगा

 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना की तरफ से गिराए गए करीब 3000 बम भी इस मंदिर पर खरोंच तक नहीं ला सके, यहां तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं। ये बम अब मंदिर परिसर में बने एक संग्रहालय में भक्तों के दर्शन के लिए रखे हुए हैं। 1965 की लड़ाई के बाद इस मंदिर का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल ( BSF ) ने ले लिया और यहां अपनी एक चौकी भी बना ली। इतना ही नहीं एक बार फिर 4 दिसंबर 1971 की रात को पंजाब रेजिमेंट और सीमा सुरक्षा बल की एक कंपनी ने मां कि कृपा से लोंगेवाला में पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजिमेंट को धूल चटा दी थी और लोंगेवाला को पाकिस्तानी टैंको का कब्रिस्तान बना दिया था। लोंगोवाला भी तनोट माता के पास ही है।
    
लोंगेवाला की विजय के बाद मंदिर परिसर में एक विजय स्तंभ का निर्माण किया गया जहां अब हर वर्ष 16 दिसंबर को सैनिकों की याद में उत्सव मनाया जाता है। तनोट माता को आवड़ माता के नाम से भी जाना जाता है तथा यह हिंगलाज माता का ही एक रूप है। हिंगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। हर वर्ष आश्विन और चै‍त्र नवरात्र में यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
   
तनोट माता मंदिर का इतिहास
बहुत पहले मामडि़या नाम के एक चारण थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्त करने की लालसा में उन्होंने हिंगलाज शक्तिपीठ की सात बार पैदल यात्रा की। एक बार माता ने स्वप्न में आकर उनकी इच्छा पूछी तो चारण ने कहा कि आप मेरे यहां जन्म लें।  माता कि कृपा से चारण के यहां 7 पुत्रियों और एक पुत्र ने जन्म लिया। उन्हीं सात पुत्रियों में से एक आवड़ ने विक्रम संवत 808 में चारण के यहां जन्म लिया और अपने चमत्कार दिखाना शुरू किया। सातों पुत्रियां दैवीय चमत्कारों से युक्त थी। उन्होंने हूणों के आक्रमण से माड़ प्रदेश की रक्षा की।
   
माड़ प्रदेश में आवड़ माता की कृपा से भाटी राजपूतों का सुदृढ़ राज्य स्थापित हो गया। राजा तणुराव भाटी ने इस स्थान को अपनी राजधानी बनाया और आवड़ माता को स्वर्ण सिंहासन भेंट किया। विक्रम संवत 828 ईस्वी में आवड़ माता ने अपने भौतिक शरीर के रहते हुए यहां अपनी चौकी की स्थापना की।

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